घ,6 दर्शनी ड़योडि में लाईन में लगे हुए यात्री 7 से 11 तक जम्मू से आए कलकार व रिजनल आउटरीच ब्यूरों के क?
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कटड़ा। आध्यात्मिक केंद्र में चल रही माता की कहानी का मंचन मां वैष्णो देवी के भक्त श्रीधर पर केंद्रित रहा। मंच पर दर्शाया गया कि किस प्रकार श्रीधर ने भंडारा लगाया तथा भोजन के समय भैरो बाबा सैकड़ों शिष्यों के साथ पहुंचते हैं। जब कन्या रूपी मां वैष्णो देवी भोजन परोसती हैं तो भैरो बाबा उनसे मांस व मदिरा लाने को कहते हैं। इनकार करने पर भैरो गुस्सा हो उठते हैं। मां वैष्णो देवी का पीछा करने लगते हैं। इस दौरान कन्या रूपी मां वैष्णो देवी यात्रा के प्रमुख पड़ावों से गुजरती हैं तथा आखिर में प्राकृतिक गुफा के बाहर भैरो का वध किया जाता है। भैरो के क्षमा याचना करने पर उन्हें वरदान दिया जाता है कि जो भक्त प्राकृतिक पिंडियों के दर्शन उपरांत भैरो मंदिर में दर्शन नहीं करेंगे, उनकी यात्रा सफल नहीं होगी। यही कारण है कि दर्शन के बाद भक्त भैरो मंदिर में दर्शन को जरूर जाते हैं।
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डेढ़ लाख भक्तों ने भवन में माथा टेका
कटड़ा। शारदीय नवरात्र में पहले छह दिन में डेढ़ लाख के करीब भक्तों ने प्राकृतिक पिंडियों के समक्ष नमन कर लिया है। औसतन हर रोज 25 हजार भक्त भवन में दर्शन को पहुंच रहे हैं। मंगलवार को भी कक्ष बंद होने तक 24990 भक्तों का पंजीकरण हो चुका था।
पंजिकरण कक्ष से मिली जानकारी अनुसार मंगलवार दोपहर बारह बजे तक नौ हजार, दो बजे तक बारह हजार, रात आठ बजे इक्कीस हजार व कक्ष बंद होने तक पच्चीस हजार के करीब पंजीकरण हो चुका था। इससे पहले पांच दिन हर रोज लगभग इतने ही यात्रियों ने भवन में दर्शन किए हैं। नवरात्र से पहले भक्तों की औसतन संख्या पंद्रह से सोलह हजार के बीच चल रही थी।
कोरोना के दौरान यह पहला मौका है कि इतनी अधिक संख्या में भक्त दर्शन को पहुंचने लगे हैं। यात्रा में इस वृद्धि पर व्यापारी भी खुश हैं तथा बाजारों आदि की रौनक लौटती नजर आ रही है। भक्तों को बाजारों आदि में खरीदारी करते देखा जा सकता है।