श्री राजमाता आश्रम शनि मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। गुरु-शिष्य के संबंध में गुरु से बढ़कर शिष्य का महत्व होता है। यह संदेश स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने कटड़ा के श्री राजमाता आश्रम शनि मंदिर में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर संगत को दिया है।
संस्थान के प्रबंधक राम वोहरा ने बताया कि स्वामी राजेश्वरानंद महाराज के सान्निध्य में एक सप्ताह से जारी श्रीमद्भागवत कथा का यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। इसके बाद उधमपुर से आए हुए बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। अंत में सद्गुरु देव की आरती उतारी गई। स्वामी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और शांति की स्थापना की अरदास की। इसके बाद भडारा हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने प्रसाद ग्रहण किया।
इससे प्रवचन देते हुए स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने कहा कि गुरु-शिष्य के संबंध में गुरु से बढ़कर शिष्य का महत्व होता है। गुरु एक मेघ के समान है। मेघ वर्षा करता ही है, लेकिन जो बर्तन उल्टा पड़ा है उसमें वर्षा का जल कैसे भरेगा या जो व्यक्ति कमरा बंद करके पड़ा हुआ है वह वर्षा की बरसती बूंदों का सुख कैसे प्राप्त कर सकता है। ठीक वैसे ही गुरु तो सदा मार्गदर्शन देकर शिष्यों का कल्याण करते हैं। अतः गुरु तो महान है ही महत्व शिष्य के समर्पण, आज्ञा पालन पर निर्भर करता है।