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शांत जिले में दहशत, 11 साल बाद विस्फोट

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उधमपुर। जम्मू-कश्मीर के सबसे शांत और सुरक्षित कहे जाने वाले उधमपुर जिले को एक बार फिर दहलाने की साजिश की गई। इससे सुरक्षा एजेंसियाें की नींद उड़ गई है। उत्तरी कमान मुख्यालय समेत सामरिक दृष्टि से कई प्रतिष्ठानों से सटे उधमपुर शहर के बीचों बीच यह पहला हमला हुआ है, लेकिन आसपास के इलाकों में इससे पूर्व भी आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं। प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में उधमपुर आतंकी वारदातों के लिहाज से महफूज माना जाता है।
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बुधवार को आईईडी विस्फोट से वर्ष 2011 में सेना के मेजर जनरल को निशाना बनाने के लिए किए गए आईईडी धमाके की घटना की यादें भी ताजा हो गईं। दो मई 2011 को आतंकियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़ी कार में आईईडी लगाकर धमाका किया था। बिरमा पुल के पास आतंकियों का निशाना मेजर जनरल थे, जिनके काफिले के गुजरने के दौरान धमाका किया गया। हालांकि वे बाल-बाल बच गए थे, लेकिन एक दूध विक्रेता की मौत हो गई थी। हमले में कई लोग घायल हो गए थे। करीब 11 वर्ष के बाद अब उधमपुर शहर में आईईडी धमाके से जिले की सुरक्षा व्यवस्था को फिर चुनौती दी गई है।
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चिनैनी तहसील में सुरक्षाबलों पर दो बार हमले
पांच अगस्त 2015 को आतंकियों ने नरसू इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीएसएफ के वाहन पर हमला किया था। इस हमले में एक आतंकी को मार गिराया गया था, जबकि मोहम्मद नावेद नाम के पाकिस्तानी आतंकी को पकड़ने में कामयाबी मिली थी। इसके बाद जून 2016 में चिनैनी तहसील के कुद इलाके में सीआरपीएफ की टीम तलाशी अभियान चला रही थी। इस दौरान यात्री बस को तलाशी के लिए रोका गया। जब बस की तलाशी ली जा रही थी, तभी अचानक उसमें सवार एक आतंकी ने सीआरपीएफ पर हमला कर दिया था। इसमें हमले में कुछ जवान घायल हो गए थे, जबकि एक महिला की मौत हो गई थी। बाद में सुरक्षाबलों ने उस आतंकी को मार गिराया था।
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