उधमपुर। विशेष जरूरत वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके तहत बच्चों की पहचान करने से लेकर उनकी पढ़ाई, सहायक उपकरण, थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी तक की व्यवस्था की जाती है। जिले में छह विशेष शिक्षक तैनात हैं, जबकि तीन संसाधन केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों को सहायता दी जा रही है।
योजना के तहत तीन से 18 वर्ष तक के बच्चों को सहायता दी जाती है। इसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को भी शामिल किया जाता है। विशेष जरूरत वाले बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए हर साल घर-घर जाकर सर्वे किया जाता है। इसमें स्कूलों में पढ़ने वाले और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की जानकारी जुटाई जाती है। योजना के तहत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से संबंधित पात्र बच्चों को उनकी जरूरत और निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता दी जाती है।
आकलन शिविरों में जांच, जरूरत के अनुसार मिलते हैं उपकरण
बच्चों की जरूरतों का पता लगाने के लिए आकलन शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम उनकी जांच करती है। जांच के आधार पर बच्चों के लिए जरूरी सहायक उपकरण मंगाएं जाते हैं। इसके बाद जोन स्तर पर वितरण शिविर लगाकर पात्र बच्चों को व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य आवश्यक सहायक उपकरण निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। जिन बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार थेरेपी की जरूरत होती है, उनके लिए भी व्यवस्था की जाती है। दिव्यांगता संबंधी निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले बच्चों को समाज कल्याण विभाग की ओर से 1200 रुपये मासिक पेंशन भी दी जाती है। इसके लिए संबंधित दस्तावेज जमा करने होते हैं।
तीन संसाधन केंद्रों से मिल रही सहायता
उधमपुर जिले में तीन संसाधन केंद्र सीईओ कार्यालय, गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल रामनगर और उधमपुर में संचालित हैं। इसके अलावा स्कूलों में भी विशेष शिक्षकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक सरकारी स्कूल में नोडल अधिकारी के माध्यम से बच्चों की जरूरतों पर नजर रखी जाती है। विशेष शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच समन्वय बनाए रखा जाता है। संबंधित विभाग में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उधमपुर जिले में करीब 1200 बच्चे स्कूलों में नामांकित हैं।
शिक्षा के साथ दूसरे क्षेत्रों में भागीदारी पर जोर
जिला संसाधन व्यक्ति एवं सीडब्ल्यूएसएन विशेष शिक्षिका अनीता शर्मा ने बताया कि योजना का उद्देश्य केवल बच्चों का स्कूलों में नामांकन करवाना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, खेलकूद और अन्य गतिविधियों में समान अवसर उपलब्ध कराना भी है। बच्चों के लिए शैक्षणिक एवं खेलकूद भ्रमण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इसके माध्यम से विशेष जरूरत वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।