उधमपुर। बाइवोल्टाइन कोकून उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले उधमपुर जिले में इस बार मौसम की नमी ने रेशम कीट पालकों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बेसिक रेट 800 रुपये निर्धारित होने के बावजूद कई किसानों को कोकून का भाव 300 रुपये तक ही मिला, जिससे उनमें नाराजगी और निराशा देखने को मिली। शुक्रवार और शनिवार को लगी मंडी में अधिकतम भाव में बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई, लेकिन इसका लाभ सभी किसानों को नहीं मिल पाया। किसानों के मुताबिक मौसम में नमी रहने से कोकून अच्छी तरह सूख नहीं पाया, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई और उन्हें कम दाम पर उपज बेचनी पड़ी।
दो दिन तक चली मंंडी में दूसरे दिन शुक्रवार को कोकून का अधिकतम भाव 1500 रुपये तक पहुंच गया, जबकि शनिवार को अधिकतम भाव 1700 रुपये रहा था। हालांकि, अधिकतम भाव मिलने के बावजूद कई किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाने से वंचित रह गए। मौसम की मार और कम कीमतों के कारण किसानों की कमाई प्रभावित हुई है। हालांकि जून माह में आयोजित मंडी में अधिकतम दाम 2100 तक पहुंचा था।
दो दिन में 296 किसानों ने बेचा कोकून, 7.11 लाख का कारोबार
उधमपुर की कोकून मंडी में शुक्रवार और शनिवार को कुल 296 किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे। शुक्रवार को 138 किसानों ने मंडी में भाग लिया, जिनमें 57 पुरुष और 81 महिला किसान शामिल थीं। इस दिन 484.850 किलोग्राम कोकून की बिक्री हुई और 3.11 लाख रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। शनिवार को मंडी में किसानों की संख्या बढ़कर 158 हो गई। इनमें 101 पुरुष और 57 महिला किसान शामिल थीं। इस दिन 1193.930 किलोग्राम कोकून की बिक्री से चार लाख रुपये का कारोबार हुआ। इस तरह दोनों दिनों में कुल 1678.780 किलोग्राम कोकून की बिक्री हुई और 7.11 लाख रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। मंडी में कुल 158 पुरुष और 138 महिला किसानों ने भाग लिया।
मेहनत और खर्च के बाद भी उचित दाम नहीं
सुनीता देवी, निर्मला, चंचला देवी, सोनू व अन्य किसानों का कहना है कि कोकून उत्पादन में शहतूत के पत्तों की व्यवस्था करने से लेकर रेशम के कीड़ों की देखभाल, फसल तैयार करने और उसे मंडी तक पहुंचाने में काफी मेहनत और पैसा खर्च होता है। इसके बावजूद जब उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। किसानों को उम्मीद थी कि उनकी मेहनत के अनुरूप कोकून का भाव मिलेगा, लेकिन कम कीमत मिलने से उन्हें निराशा हाथ लगी।
नमी के कारण प्रभावित हुई गुणवत्ता
रेशम कीट पालन में तापमान और नमी का संतुलन महत्वपूर्ण होता है। तैयार कोकून को अच्छी तरह सुखाना और सुरक्षित रखना भी जरूरी है। इस बार मौसम में नमी बने रहने के कारण कोकून पूरी तरह सूख नहीं पाया। इससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रही। किसानों का कहना है कि मौसम की मार के साथ कम भाव मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
कोट
मौसम में नमी रहने के कारण कोकून की फसल अच्छी तरह सूख नहीं पाई थी। ठेकेदारों ने कोकून की गुणवत्ता को देखते हुए दाम दिए। विभाग की ओर से प्रयास किया गया कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और उन्हें किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।
-
कविता शर्मा, जिला रेशम उत्पादन अधिकारी