उधमपुर। बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। इस बात को उधमपुर के कल्लर वार्ड नंबर 21 की रहने वाली 16 वर्षीय तेजस्वी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से साबित कर दिखाया है। तेजस्वी ने 11 और 12 सितंबर को भगवती नगर जम्मू में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ ही उसका चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है। अब तेजस्वी कांगड़ा में आयोजित होने वाली आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।
बेटी की इस उपलब्धि से पिता राजकुमार और माता रेखा देवी बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। उनकी तीन बेटियां हैं लेकिन उन्होंने कभी बेटे की कमी महसूस नहीं की। उन्होंने कहा कि आज उनकी बेटी ने कराटे में गोल्ड मेडल जीतकर परिवार का नाम रोशन किया है जो उनके लिए गर्व की बात है। माता-पिता ने कहा कि बेटियों को यदि परिवार का सहयोग और आगे बढ़ने का अवसर मिले तो वे हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं
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तेजस्वी ने बताया कि कराटे चैंपियन बनने का जुनून उन्हें एक हार के बाद मिला। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें इस खेल को लेकर कोई रूचि नहीं थी फिर एक बार स्कूल में आयोजित कराटे प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सा लिया था, लेकिन वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस हार से निराश होने के बजाय उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया। उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि वह कराटे में बेहतर प्रदर्शन करेंगी और एक दिन चैंपियन बनेंगी।
इसके बाद तेजस्वी ने नियमित रूप से कराटे की ट्रेनिंग शुरू की और लगातार मेहनत व अभ्यास करती रहीं। उनकी मेहनत रंग लाई और अब उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए अपना स्थान पक्का कर लिया है।
तेजस्वी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को भी दिया। उन्होंने कहा कि परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी ट्रेनिंग में पूरा सहयोग दिया। परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत के दम पर वह इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। तेजस्वी ने अन्य युवक-युवतियों को संदेश देते हुए कहा कि कराटे केवल एक खेल नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के साथ-साथ आत्मरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और किसी भी हार से निराश न होने की अपील की।
तेजस्वी ने अभिभावकों से खास तौर पर अपील की कि वे अपनी बेटियों को भी बेटों की तरह आगे बढ़ने के समान अवसर दें। उन्होंने कहा कि परिवार का विश्वास और सहयोग बेटियों के आत्मविश्वास को मजबूत करता है। बेटियां जब अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ती हैं तो उनकी सफलता पूरे परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बनती हैं।
तेजस्वी की कराटे में यह उपलब्धि न केवल उसके परिवार के लिए गर्व का विषय है बल्कि क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि हार अंत नहीं होती, बल्कि सही हौसले और मेहनत के साथ वही हार सफलता की पहली सीढ़ी बन सकती है।