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Udhampur News: लकड़ी के जुगाड़ू पुल के सहारे नदी पार कर रहे लोग, हादसे की आशंका

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बांती पुल बहने के बाद लकड़ी के जुगाड़ू पुल से नदी पार करते ग्रामीण। - फोटो : udhampur news
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उधमपुर। बीते 26 अगस्त को तेज बारिश और बाढ़ की वजह से समरोली के नजदीक बांती पुल (देवाल) के बह जाने की वजह से आसपास की करीब 15 पंचायतों की 40 हजार आबादी का जिला मुख्यालय तक का सीधा संपर्क कट चुका है। लकड़ी के जुगाड़ू पुल के सहारे लोग नदी पार करने को मजबूर हैं। इस दौरान कभी भी हादसा हो सकता है।
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बीते लगभग तीन महीने से यह लोग आवाजाही को लेकर भारी परेशानी में हैं। पहले जान का जोखिम उठाकर यह लोग नदी के बीच से होकर आवाजाही करने पर मजबूर थे। अब ठंड बढ़ने के बाद इन्होंने नदी पार करने के लिए लकड़ी के शहतीर लगाकर जुगाड़ू पुल तैयार कर लिया है। अगर इस बीच अगर तवी नदी का जलस्तर बढ़ता है तो यह गंभीर हादसे का कारण भी बन सकता है। सबसे अधिक खतरा विद्यार्थी वर्ग के लिए बना हुआ है जिन्हें रोजाना इस अस्थायी प्रबंध के सहारे नदी के आरपार आवाजाही करनी पड़ रही है।
वहीं इसको लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी भी लगातार बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि पुल बहने के बाद से लोग यहां कैद हो चुके हैं क्योंकि उनके लिए नदी के आरपार आवाजाही का कोई साधन नहीं बचा है। इस दुविधा ने इन प्रभावित इलाकों की ऐसी दर्जनों बालिकाओं की शिक्षा पर भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जो जिला मुख्यालय के विभिन्न स्कूलों और काॅलेजों की छात्राएं हैं और अपने शैक्षिक संस्थानों तक पहुंचने के लिए जान का जोखिम उठा रही हैं। अन्य कामकाजी लोग भी भारी परेशानी में हैं।
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बाढ़ में बहे पुल का जल्द निर्माण करवाए प्रशासन
स्थानीय निवासी शक्ति देवी, शमशेर सिंह, सुरजीत चंद व अन्य ने कहा कि बांती पुल लगभग 15 पंचायतों की लाइफलाइन है, लेकिन अब इसके बह जाने के बाद यह पूरा इलाका जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लगभग 8 किलोमीटर पैदल घूम कर आना पड़ रहा है और इस परेशानी से बचने के लिए कई नौजवान और स्कूली विद्यार्थी जान को जोखिम में डालकर नदी के बीच से होकर भी आवाजाही करने पर मजबूर हो रहे हैं। यह पूरे इलाके के लिए एक बड़ा जोखिम है। इसलिए प्रशासन से उनकी अपील है कि जल्द से जल्द पुल को बहाल कर राहत दिलाई जाए। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के कारण पुल का केवल ऊपरी हिस्सा बहा है, नीचे के पिल्लर पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एक महीने के अंदर इस पुल के निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे उग्र प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
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कोट
पुल के निर्माण कार्य की डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए भेजी गई है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद प्राथमिकता पर आगे का काम शुरू कर दिया जाएगा।
-बलवंत सिंह मनकोटिया, विधायक

रिपोर्ट-विजय कुमार
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