कई महीनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे पोर्टरों ने शनिवार को हाईवे जाम किया। इस दौरान पुलिस ने उनको तितर-बितर करने के लिए हलका बल प्रयोग किया। इसके चलते पुलिस और पोर्टरों में धक्का मुक्की भी हुई।
काफी प्रयास के बाद प्रदर्शनकारियों को खदेड़ कर जाम खुलवाया गया। सुबह से ही प्रदर्शनकारी समाजसेवक एजाज सूंबरिया के नेतृत्व में पोर्टर जमा होने लगे। पोर्टरों ने अलग-अलग होकर व्यस्त एमएच चौक पहुंचना शुरू कर दिया।
पुलिस ने भी पहले से ही तैयारियां कर ली थी ताकि हाईवे पर कोई रुकावट नहीं आए। दोपहर बारह बजे के करीब अचानक पोर्टरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। पोर्टर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
कुछ पोर्टरों ने अपनी कमीजें भी उतार दीं। जैसे ही पोर्टर हाईवे पर आए तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास शुरू कर दिया। पुलिस ने डंडों के सहारे प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। इस दौरान काफी धक्का-मुक्की भी हुई। हलका बल प्रयोग भी हुआ।
इस दौरान एजाज सुंबरिया ने केेंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले 15 साल से पोर्टरों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कारगिल युद्ध के दौरान कई युवाओं ने सेना के सहयोग का फैसला किया।
देशभक्ति की भावना से पोर्टर बने इन युवाओं को बाद में कहा गया कि सेना में उन्हें भर्ती किया जाएगा। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। वर्ष 1999 के बाद कुछ साल ही उनसे काम लिया।
बाद में सेवाएं रद कर दी गई। सभी पोर्टर सेना की भर्ती में गए, लेकिन उन्हें कोई प्राथमिकता नहीं मिली। लगातार भर्ती में पोर्टरों को प्राथमिकता की मांग की जाती रही। सभी पोर्टर अब ओवरएज हो गए हैं। पोर्टरों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह उग्र प्रदर्शन करने से भी नहीं चूकेंगे।