उधमपुर में आयोजित सम्मान समारोह।
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उत्तरी कमान उधमपुर में मंगलवार को भव्य अलंकरण समारोह का आयोजन हुआ। इसमें 116 सेना के अधिकारियों व जवानों को आतंकवादियों और सीमा पर दुश्मनों को मार गिराने, नागरिकों को दुश्मनों से बचाने व अन्य बहादुरी के कार्य पर युद्ध सेवा मेडल, बार टू सेना मेडल वीरता, सेना मेडल वीरता, सेना मेडल प्रतिष्टा और विशिष्ट सेवा मेडल के साथ सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ उत्तरी कमान उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे।
समारोह में विषम परिस्थितियों में अनुकरणीय साहस दिखाने वाले 92 वीरों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 19 वीरों को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार दिए गए। यह पुरस्कार उनके परिजनों को सौंपे गए। वहीं, राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के लिए 25 बहादुर जवानों को विशिष्ट सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में कुल 116 वीरों को सम्मानित किया गया। इस अवसर उत्तरी कमान एडब्ल्यूडब्ल्यूए की क्षेत्रीय अध्यक्ष सुनीता द्विवेदी ने जवानों के परिजनों के साथ बातचीत की और उनके बलिदानों की सराहना करते हुए प्रतीक चिन्ह भेंट किए।
कमांडिंग इन चीफ उत्तरी कमान के कार्यक्रम में पहुंचने पर सुबह करीब नौ बजे कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। करीब साढ़े 11 बजे चले कार्यक्रम में चार युद्ध सेवा मेडल, एक बार टू सेना मेडल वीरता, 90 सेना मेडल वीरता, दस सेना मेडल प्रतिष्ठा, 11 विशिष्ट सेवा प्रदान प्रदान किए गए। मेजर दीपन गुरंग को सेना मेडल वीरता के साथ सम्मानित किया गया। लद्दाख में आपरेशन स्नो लियोपर्ड के दौरान 17 अधिकारी को घातक प्लाटून को वास्वकिव नियंत्रण रेखा के साथ 17 हजार फीट की ऊंचाई पर रिज लाई पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। दुश्मन के सैनिक भी तेजी के साथ रिजलाई की तरफ बढ़ रहे थे। अधिकारी ने अपने प्लाटून का नेतृत्व करते हुए कठिन मार्ग से लक्ष्य पर दुश्मन से भी पहले पहुंच कर दुश्मन की प्लेटून को रिजलाइन से पहले रोका, जिससे दुश्मन के नापाक इरादे विफल हो गए।
कैप्टन विश्वदीप सिंह सेना मेडल वीरता से सम्मानित
आपरेशन स्नो लियोपार्ड के दौरान कैप्टन विश्वदीप सिंह को भी सेना मेडल वीरता के साथ सम्मानित किया गया। 30 अगस्त 2020 की रात को एक आपरेशन में अधिकारी ने उत्तम युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक राइफल कंपनी को 18 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित पोजिशन तक पहुंचने में मार्गदर्शन किया। इसके परिणाम स्वरूप भारतीय सेना उस महत्वपूर्ण स्थान पर तैनात होकर दुश्मन पर अपना प्रभुत्व बनाने में सक्षम रही। इसी तरह से एक-एक कर वीर अधिकारियों व जवानों की वीर गाथाओं को सुनाया गया और 116 मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
उत्तरी कमान के सभी वीरों की सराहना की
इस दौरान सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं और कर्तव्यों के प्रति समर्पण के लिए उत्तरी कमान के सभी वीरों की सराहना की। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर जवानों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत एक राष्ट्र के दृष्टिकोण के चलते जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में सुरक्षा स्थिति में प्रगतिशील सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा खतरों के अलावा देश के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों का सामना करने वाली यह एकमात्र कमान है। उत्तरी कमान के सभी पदों के बीच असाधारण जोश और उत्साह हमें आश्वस्त करता है कि उत्तरी कमान की सुरक्षा मजबूत कंधों पर है।