उधमपुर। जिले में चल रहे पानी के अवैध कनेक्शनों को लेकर जल शक्ति विभाग अब तक कुछ नहीं कर पाया है। इससे विभाग को हर वर्ष लाखों का चूना लग रहा है। विभाग ने इसको लेकर टीम भी गठित की, लेकिन इन कनेक्शनों को न तो बंद किया जा सका और न ही वैध किया जा सका।
वर्ष 2010 तक शहर में पानी का वार्षिक किराया मामूली था। किराया मामूली होने के चलते जल शक्ति विभाग अवैध रूप से चल रहे पानी के कनेक्शनों को लेकर कभी चिंतित नहीं हुआ। लेकिन 2011 में अचानक राज्य जल संसाधन नियामक प्राधिकरण ने किराया बढ़ाकर आठ सौ रुपये कर दिया। किराया बढ़ने पर पानी चोरी होने से विभाग की चिंता बढ़ने लगी।
2021 तक पानी का वार्षिक किराया करीब तीन हजार रुपये तक पहुंच चुका है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध कनेक्शनों के कारण हर वर्ष विभाग को लाखों का चूना लग रहा है। पीएचई विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर के 21 वार्डों में एक लाख से अधिक आबादी है। इनमें करीब 17 हजार पानी के कनेक्शन हैं। जबकि, विभाग को अंधेरे में रखकर एक हजार से अधिक अवैध कनेक्शन चल रहे हैं। आंकड़ों के हिसाब से विभाग को लाखों का नुकसान हो रहा है।
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शहरवासियों को हर दिन कम मिल रहा 16 लाख गैलन कम पानी
अवैध कनेक्शन के कारण भी जल शक्ति विभाग शहरवासियों को पर्याप्त पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। शहर के 21 वार्डों को हर रोज 54 लाख गैलन पानी की जरूरत है। लेकिन, विभाग अब तक दो फिल्टरेशन प्लांट से केवल 38 लाख गैलन पानी ही दे पा रहा है। हर रोज शहरवासियों को पीएचई विभाग से 16 लाख गैलन पानी कम मिल रहा है। एक हजार अवैध कनेक्शनों के कारण हजारों गैलन पानी चोरी हो रहा है। जिसके कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी की समस्या कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है।
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इसको लेकर कमेटी का गठन किया गया था, और कुछ दिन कार्रवाई भी गई। लेकिन, अब तक सभी लोगों को पकड़ा नहीं जा सका है। अब जल शक्ति विभाग का ज्यादातर काम नगर परिषद को सौंपा गया है। उन्होंने इसको नगर परिषद के अधीन रखा है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में नगर परिषद के साथ मिल कर इस पर काम शुरू किया जा सके।
- ताज चौधरी, एक्सईएन जल शक्ति विभाग