फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिर पर बैग-हाथ में जूते, स्कूल चले हम

विज्ञापन
विज्ञापन
चिनैनी। सच कहा जाता है। परेशानी और दुश्वारियां चाहे जितनी हों। आपके लगन और जोश के सामने नहीं टिक सकतीं हैं। कुछ ऐसे ही हालात ऐला, मंदिर दौशाला के विद्यार्थियों के सामने भी हैं। जिससे वह लड़ रहे हैं। गांव के दर्जनों बच्चे चिनैनी हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी व कालेज में पढ़ाई के लिए जाते है। स्कूल जाने के लिए कोई सुगम रास्ता नहीं। बच्चों को पटनीटॉप (करलाह-कुंद) नाले के बीच होकर गुजरना पड़ता है। विद्यार्थी नाले की धार चीरकर किसी तरह स्कूल पहुंचते हैं।
विज्ञापन

स्कूल पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विद्यार्थी सिर पर कॉपी-किताबों का बैग रखकर, हाथ में जूते व मोजे पकड़कर एक दूसरे का हाथ थामकर नाला पार करते हैं। इतना ही नहीं कई छोटे बच्चों को उनके अभिभावक कंधे पर बैठाकर नाला पार कराते हैं। नाले का जलस्तर बढ़ने पर इन बच्चों को और भी परेशानियाें का सामना करना पड़ता है।
एक अच्छी शिक्षा पाने के लिए ऐसा केवल छात्र ही नहीं, बल्कि छात्राएं भी करने को मजबूर हैं। नाले से गुजरने के लिए ऐला व मंदिर दौशाला गांव के लोग ही नहीं, बल्कि खरूबा, बैणी संगम, बांई आदि के ग्रामीण भी कतार में हैं। नाले को आसानी से पार करने का कोई साधन नहीं है। पैदल रास्ते पर भी कई प्रकार की दुश्वारियां हैं। इसके अलावा गांव के लोग और भी परेशानियों से जूझ रहे हैं। जैसे गांव में यदि कोई बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ग्रामीण शमशेर सिंह, अजय कुमार, गोपाल सिंह ने बताय कि बारिश के दिनों में तो लंबा रास्ता तय कर लोग चिनैनी पहुंचते है। नाले में जलस्तर बढ़ जाने के कारण बच्चे घरों में ही कैद हो जाते हैं। कई बार हादसा होने से बचे हैं।
विज्ञापन

पुल बनने से 300 परिवारों को राहत
गांव के लोगों ने बताया कि बांई पंचायत में कई गांव आते है। जिसमें ऐला गांव में 20, मंदिर दौशाला में 50, खरूबा में 30, बैणी संगम में 100, बांई में 100 परिवार रहते हैं। कुल आबादी करीब 3000 है। खरूबा, बैणी संगम व बांई के लिए संपर्क मांग है। मगर उनकी दूसरी अधिक होने के कारण लोग कम समय में चिनैनी पहुंचने के लिए इसी नाला मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ऐला व मंदिर दौशाला के लिए सड़क मार्ग ही नहीं है। ऐसे में नाले का पुल बनने से करीब 300 परिवारों को राहत मिलेगी।
----------------------------
पुल बनाने की कई बार मांग की
गांव के लोगों का कहना है कि कई बार नाले के ऊपर पुल बनाने की मांग की गई है। अधिकारियों ने आश्वासन भी दिया, लेकिन समस्या आज भी जस की तस है। सुनवाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर चिनैनी के कुंद नाले पर पुल बन जाए तो कई गांव के लोगों को राहत होगी। आवागमन आसानी से हो सकेगा और समय भी बचेगा।
------------------------
पैदल मार्ग की हालत भी दयनीय
चिनैनी के करलाह, कुंद नाले से ऐला, मंदिर दौशाला जाने वाला पैदल मार्ग भी दयनीय हालत में है। मार्ग पथरीला और दुर्गम होने के कारण छात्र-छात्राओं को काफी संभलकर आना-जाना पड़ता है। रास्ते की दयनीय हालत के कारण कई बार बच्चे गिरकर घायल भी हो जाते है। गांव के लोगों ने कई बार पैदल मार्ग की हालत में सुधार की मांग की, मगर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बारिशों में दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। लोगों ने सरकार से समस्या के समाधान की मांग की है।
------------------------
वर्जन
लोक निर्माण विभाग के एईई सुुुरेश भारती ने बताया कि करलाह, कुंद नाले पर स्टील गार्डर पुल 35 मीटर स्पैन और करीब 60 लाख का प्लान बनाया गया है। उम्मीद है इसको लेकर जल्द मंजूरी मिलेगी और ग्रामीणों की समस्या दूर होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें