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रखरखाव के अभाव में खराब पड़े पांच सौ से ज्यादा हैंडपंप

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उधमपुर के मिनी स्टेडियम में कई वर्षों से खराब पड़ा हैंडपंप - फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। जिले में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए सरकार के लगाए सैकड़ों हैंडपंप रख रखाव के अभाव में खराब पड़े हैं। लोगों को उम्मीद थी कि हैंडपंप लगने से पानी की किल्लत दूर हो जाएगी। लेकिन, ऐसा हो न सका।
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जल शक्ति मेकेनिकल ग्राउंड वाटर डिवीजन का कार्यालय उधमपुर में नहीं है। इसलिए लोगों का कहना है कि शिकायत करें तो करें किसके पास? विभाग ने जिले में अब तक ढाई हजार से ज्यादा हैंडपंप लगाए हैं। जिनमें से करीब पांच सौ हैंडपंप कई वर्ष से खराब पड़े हैं। ज्यादातर हैंडपंप उन ग्रामीण इलाकों में लगाए गए हैं, जहां जल शक्ति विभाग की सप्लाई के लिए पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है।
हैंडपंप खराब होने से सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीणों को है। क्योंकि उनके लिए हैंडपंप बहुत बड़ा सहारा हैं। जगानू के गणेश कुमार, संबल के मदन लाल, गंडाला के राजकुमार, बट्टलबालियां के सुरेश कुमार समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि करीब 14 वर्ष पहले जब गांव में हैंडपंप लगाए गए थे तो लगा था कि अब पानी की समस्या हल हो जाएगी। लेकिन, कुछ वर्ष बाद रखरखाव के अभाव में हैंडपंप खराब हो गए। कुछ की मरम्मत करवाई गई। लेकिन, कुछ महीनों के बाद वह फिर से खराब हो गए।
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उधमपुर में नहीं है जलशक्ति मेकेनिकल ग्राउंड वाटर डिवीजन का कार्यालय
पीएचई मेकेनिकल ग्राउंड वाटर डिवीजन का कार्यालय उधमपुर में न होने के कारण भी खराब होने के बाद हैंडपंप ठीक नहीं हो पा रहे हैं। लोगों ने बताया कि उन्हें पता ही नहीं है कि हैंडपंप की खराबी के बारे में किस विभाग को सूचित करें। जब हैंडपंप खराब होता है तो वह शिकायत करने के लिए जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के पास चले जाते हैं। जल शक्ति के अधिकारी संबंधित विभाग के अधिकारियों तक बात पहुंचा कर समस्या को हल कराने का आश्वासन देकर गांववासियों को वापस भेज देते हैं।
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ग्राउंड वाटर का कोई कार्यालय न होने के कारण शिकायतें जल शक्ति विभाग और डीसी कार्यालय तक पहुंचती हैं। इन शिकायतों के बारे में संबंधित विभाग को जानकारी भी दी जाती है। जल शक्ति विभाग जल शक्ति मिशन के तहत हर घर में नल पहुंचाने को लेकर काम कर रहा है।
- ताज चौधरी, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग
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जिले में हजारों हैंडपंप लगे हैं। सैकड़ों खराब भी हैं। हैंडपंप की मरम्मत कराने का काम अब पंचायत प्रतिनिधियों को ही करवाना है। सरपंच, बीडीसी और डीडीसी को कैपेक्स बजट के तहत फंड उपलब्ध करवाने हैं। जिनके पास फंड थे, उन्होंने मरम्मत कराई है। लेकिन, जिनके पास फंड खत्म है, वह मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं। इसके लिए प्रयास चल रहे हैं।
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- लाल चंद, डीडीसी अध्यक्ष, उधमपुर
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