उधमपुर के रठियान क्षेत्र में संगत को कथा सुनाते कथावाचक संत सुभाष शास्त्री
- फोटो : UDHAMPUR
उधमपुर। नगर के साथ लगते रठियान पंचायत के खरूनी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को कथावाचक संत सुषाष शास्त्री ने संगत को सत्संग का महत्व समझाते हुए कहा कि सत्संग में आने से संत और भगवंत दोनों की प्राप्ति होती है। सत्संग से पाप और अज्ञान का नाश होता है। हृदय में भक्ति-ज्ञान का प्रकाश व निश्वित ही मनुष्य करा विकास एवं प्रभु चरणों में निवास होता है।
उन्होंने विचारों में कहा कि जहां ज्ञान का अभाव है, वहां सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है। अंत: संत (गुरु) के पास ज्ञान रूपी धन होने से सब कुछ है, लेकिन उस धन को अपने पुरूषार्थ आप प्राप्त करो। एक शिष्य (सेवक) का बस यही कर्तव्य है कि वह अपना मन संत (गुरु) को समर्पित कर, उनके श्री चरणों में लगा ले। अर्थात सत्संग करे, सेवा करे, साधना करे और सद्भाव रखते हुए सुमिरन करे, तभी सत्संग में आने का सही अर्थों में लाभ है।
उन्होंने कहा कि हम सदा आपको यह बताते है कि जो देखता है वह सत्य है, अविनाशी है और जो दिखने वाला है वह नाशवान है, लेकिन रोजाना यह सुनने के बाद भी आप दिखने वाले वस्तु एवं पदार्थों की कामना ही करते रहते हो और केवल दुख को प्राप्त होते हो। उन्होंने कहा कि हम हर सत्संग में समझाते हैं कि हर दिखने वाली वस्तु का नाश अवश्यंभावी हैं, और सत्य (प्रभु) अविनाशी है। इसलिए अविनाशी के विषय में समझों और जानो और उसे गुरु के मार्ग दर्शन में पहचान कर प्राप्त कर लो। फिर किसी और चीज की अभिलाषा नहीं रहेगी। अंत में उन्होंने संगत से अनुरोध किया कि सत्संग में जरूर आएं, लेकिन घर-संसार का कामकाज प्रभावित न हो। और सत्संग में जो भी सत्य के विषय में सुने, उसपर आचरण अवश्य करें।