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मकर संक्रांति पर सूर्य देव ने किए भगवान शिव के दर्शन

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चिनैनी। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हर वर्ष की भांति इस बार भी सूर्य देव ने बाबा बूढ़ा केदारनाथ की गुफा में बैठे भगवान शिव के दर्शनों के लिए गुफा में प्रवेश किया। और कुछ देर गुफा में रुकने के बाद वह बाहर आ गए। उनके निकलते ही गुफा में अंधेरा छा गया। यह अलौकिक दृश्य देखकर लोगों ने भगवान शिव के जयकारे लगाना शुरू कर दिए।
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हर वर्ष मकर संक्रांति के पावन अवसर पर चिनैनी तहसील के गांव धनास में स्थित बाबा बूढ़ा केदारनाथ में सूर्य देव की किरण गुफा के अंदर तक पहुंचती है। और, कुछ देर गुफा को रोशन कर और भगवान शिव के दर्शन करने के बाद सूर्य देव वहां से बाहर आ जाते हैं। जिसके बाद गुफा में फिर से अंधेरा छा जाता है। फिर गुफा को बिजली से रोशन किया जाता है।
दरअसल, बाबा बूढ़ा केदारनाथ में कई रहस्य छिपे हुए हैं। मकर संक्रांति को हर वर्ष सूर्य देव की पहली किरण गुफा के अंदर तक पहुंचती है। कई बार भगवान शिव के घुटने पर भी जाती है। इस अलौकिक दृश्य के दर्शनों के लिए वहां सैकड़ों लोग मौजूद रहते हैं। बाबा बूढ़ा केदारनाथ की गुफा में सूरज की किरण पहुंचने का कोई साधन नहीं है। यही एक दिन निश्चित है, जब सूर्य की किरण गुफा के अंदर प्रवेश करती है।
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मंदिर में अपने आप बजती हैं घंटियां
मंदिर कमेटी के प्रधान श्याम सिंह ने बताया कि शुक्रवार की सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु बाबा बूढ़ा केदारनाथ में मौजूद थे, और भगवान शिव की गुफा के अंदर सूर्य की किरण पड़ने का इंतजार कर रहे थे। वहीं, सुबह नौ से 10 के बीच में सूर्य की किरण गुफा के अंदर रही। इस दौरान गुफा के अंदर बिजली भी बंद की गई थी। गुफा के अंदर सूर्य की किरण पहुंचने के बाद वहां भगवान शिव के जयघोष गूंजने लगे। उन्होंने बताया कि इसी मंदिर में भगवान शिव का घुटना है, और भस्मासुर का अंत भी इसी स्थान पर हुआ था। इस मंदिर में अपने आप पूजा होती है और अपने आप घंटियां बजती हैं। लेकिन, इसके लिए न ही दिन निश्चित है, और न ही समय। यहां पर कभी भी पूजा व घंटियां बजने लगती हैं। और उस दौरान कोई भी श्रद्धालु गुफा के अंदर नहीं जा सकता।
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