उधमपुर। अनदेखी के चलते शहर व आसपास की बावलियां और तालाब के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इनके संरक्षण के लिए सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई तालाबों का अस्तित्व खत्म हो चुका है। इसलिए जिला प्रशासन को बावलियों और तालाब को बचाने के लिए ध्यान देना चाहिए। यह मांग जियो और जीने दो संस्था के प्रधान तारिक शाह ने प्रेसवार्ता में उठाई है।
उन्होंने कहा कि एक समय उधमपुर को बावलियों और तालाब के नाम से जाना जाता था। लेकिन मौजूदा समय में विलुप्त हो रहे हैं। सैला तालाब, जोज्जड़े तालाब, गैड़ा तालाब खत्म हो चुके हैं। सियाल कब्रिस्तान के पास के तालाब को मलबे से भरा जा रहा है। तालाब बारिश के जल का भी संचयन करते हैं। देविका नदी के किनारों से अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। प्रशासन से अपील है कि इस दिशा में कदम उठाया जाए। उधमपुर में एक समय 108 बावलियां और कई तालाब थे। संस्था 2011 से इनके संरक्षण के लिए आवाज उठा रही है। इसलिए मांग है कि प्रशासन जल्द इनके संरक्षण के लिए कोई योजना तैयार करे। इस मौके पर परवीन अख्तर, अली, शाम व अंजू आदि मौजूद रहे।