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घाटी में टारगेट किलिंग: जम्मू-कश्मीर का माहौल अशांत करने की साजिश में आतंकी, अमरनाथ यात्रा और विस चुनाव में भी खलल डालने की कोशिश

सार

घाटी में आतंकी टारगेट किलिंग को लगतार अंजाम दे रहे हैं। इसका मकसद अमरनाथ यात्रा और विधानसभा चुनावों में खलल डालना है। बडगाम जिले में गुरुवार को आतंकियों ने तहसीलदार कार्यालय में घुसकर एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी राहुल भट की गोली मार कर हत्या कर दी। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी इस तरह से घाटी का माहौल अशांत करने की कोशिश में हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से बदलाव के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी भंग करने में जुटे हुए हैं। 
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आतंकी हमले में मारे गए राहुल भट के परिजन बिलखते हुए - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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कश्मीर में लगातार बदलाव को देखते हुए आतंकी फिर से टारगेट किलिंग को अंजाम देकर दहशत फैलाने की फिराक में लगे हुए हैं। एक साल के भीतर पूरी घाटी में सुरक्षाबलों ने बड़े ऑपरेशन चलाकर सभी प्रमुख आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी है। इसके अलावा उनके मददगारों पर भी लगभग लगाम लगा दी है। आतंकियों को पैसा मुहैया कराने वाले संगठनों पर भी एजेंसियों का पहरा है। इसी बौखलाहट को देखते हुए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी अब कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक घाटी के शांत माहौल को देखते हुए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। इससे केंद्र और प्रदेश सरकार के लगातार प्रयासों के बाद बदलते कश्मीर के माहौल के बारे में बेहतर संदेश देश के अन्य लोगों तक पहुंच रहा है। इसी को देखते हुए आतंकी संगठन बौखलाए हुए हैं। वह नहीं चाहते कि कश्मीर में स्थिति शांत बनी रहे। इसलिए कर्मचारियों और अन्य नागरिकों को निशाना बनाकर दहशतदर्ग अशांति फैलाना चाहते हैं।  

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आतंकी हमले में घायल राहुल भट को अस्पताल ले जाते लोग - फोटो : बासित जरगर

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में बड़ी वारदात करने में नाकाम पाकिस्तान अब अमरनाथ यात्रा से पहले घाटी के माहौल को पूरी तरह बिगाड़ने की साजिशों में जुट गया है। घाटी में फिर टारगेट किलिंग की घटनाएं बढ़ गई हैं। निशाने पर पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस व सेना के जवान हैं। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि अमरनाथ यात्रा से पहले और गर्मी के मौसम में शुरू होने वाले पर्यटन सीजन में अधिक से अधिक वारदातों को अंजाम देने की आईएसआई की ओर से घाटी में सक्रिय पाकिस्तानी दहशतगर्दों और विभिन्न आतंकी तंजीमों को हिदायत दी गई है।  बदलते कश्मीर में आतंकवाद की कमर लगभग टूट चुकी है।

आतंक की राह पर जाने वाले युवाओं की संख्या में कमी 

आतंक की राह पर जाने वाले युवाओं की संख्या कम हुई है। पत्थरबाजों का साथ नहीं मिल रहा है। सुरक्षा बलों की ओर से लगातार शिकंजा कसते हुए आतंकी तंजीमों के कमांडरों का एक-एक कर सफाया कर दिया गया है। इससे आतंकियों को कोई बड़ा मौका हाथ नहीं लग पाया है।  खुफिया सूत्रों के अनुसार आतंक के मोर्चे पर अपना गेम प्लान फेल होता देख पाकिस्तान अब नए सिरे से घाटी में हिंसा का माहौल बनाने की साजिशों में जुटा है। इसी के तहत पंचायत प्रतिनिधियों और पुलिस व सेना के निर्दोष जवानों की टारगेट किलिंग फिर से बढ़ाने की हिदायत दी गई है।

हाइब्रिड आतंकियों और ओवर ग्राउंड वर्करों को टास्क सौंपा

मार्च के महीने में टारगेट किलिंग की घटनाओं में इसी वजह से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।  खुफिया सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में ये घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इसके लिए हाइब्रिड आतंकियों और ओवर ग्राउंड वर्करों को टास्क सौंपा गया है। आईजी विजय कुमार बताते हैं कि सुरक्षा बल मुस्तैद हैं। पड़ोसी मुल्क हर वक्त यहां माहौल बिगाड़ने की कोशिशों में जुटा रहता है, लेकिन उसे नाकाम बनाया जा रहा है। वह अपने नापाक मकसद में कभी कामयाब नहीं हो पाएगा। 

आतंकी हमले में मारे गए राहुल भट के परिजन बिलखते हुए - फोटो : बासित जरगर

विस चुनाव की सुगबुगाहट के बीच दहशत पैदा करने की साजिश

विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट को देखते हुए भी आतंकी तंजीमों को माहौल बिगाड़ने के निर्देश हैं। चूंकि, हुर्रियत का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है। जमात-ए-इस्लामी पर शिकंजा कसा गया है। ऐेसे में अलगाववादियों की ओर से चुनाव बहिष्कार की कॉल के असर दिखाने की संभावना न के बराबर है। युवा अब अपने करियर के प्रति संवेदनशील हो गया है। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने के लिए दहशत व भय का वातावरण बनाने के लिए आतंकी गतिविधियों को तेज करने का षडयंत्र है। 

कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने के प्रयास को किया जा रहा कमजोर 

घाटी में 90 के दशक में शुरू हुई टारगेट किलिंग जैसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। इस बार यह माहौल आतंकियों की ओर से कुछ विशेष वजह से बनाया जा रहा है। दरअसल केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर में अमन बहाली और फिर से कश्मीरी पंडितों और अल्पसंख्यकों को दोबारा घाटी में बसाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को कमजोर करने के लिए आतंकी संगठन ऐसा कर रहे हैं।
 

बडगाम में कश्मीर पंडित को गोली मारने की घटना के बाद पहुंचे सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर

अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग के पीछे आईएसआई का हाथ 

कश्मीर में अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई का हाथ है। यह सब तालिबान की तर्ज पर इस्लामिक जिहाद को कश्मीर में बढ़ावा देने की नई साजिश का हिस्सा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान में तालिबानियों के राज के बाद पाकिस्तान के हौसले बढ़े हुए हैं। अब पाकिस्तान भारत को कश्मीर के जरिये अस्थिर करने के लिए व्यापक पैमाने पर हिंसा, सोशल मीडिया के जरिये झूठ का प्रचार और कट्टरता का बीज बोने की कोशिश करेगा।  विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले दो साल में सुरक्षा बलों के हौसले बुलंद रहे।

सभी आतंकी तंजीमों के कमांडर मार गिराए गए

लगभग सभी आतंकी तंजीमों के कमांडर मार गिराए गए। पत्थरबाजी थम गई। युवाओं की भर्ती बंद हो गई। न तो जमात और न ही अलगाववादियों की ओर से स्वर उठे। बदले कश्मीर के लोग रोजगार और विकास की राह देखने लगे। बदली परिस्थितियों में केंद्र सरकार ने कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की तैयारियां तेज कर दीं। पिछले कुछ समय से पंडितों की जमीन से कब्जे हटाए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस प्रमुख डॉ. एसपी वैद कहते हैं कि आईएसआई ने अपनी रणनीति बदलते हुए इस्लामिक आतंकवाद का खेल खेलने की साजिश रची है। वह पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर वैसे लोगों को निशाना बना रहा है जिन्होंने आतंकवाद के चरम में भी घाटी नहीं छोड़ी। 

बडगाम में कश्मीर पंडित को गोली मारने की घटना के बाद पहुंचे सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर

अक्तूबर 2021 में आतंकियों की गोली का निशाना बने 13 स्थानीय नागरिक 

अक्तूबर 2021 में 13 स्थानीय नागरिक मारे गए जिसमें से 8 को श्रीनगर में मारा गया है। इनमें छत्ताबल के अब्दुल रहमान गुरु, एसडी कॉलोनी बटमालू के पीडीडी कर्मचारी मुहम्मद शफी डार, बिंदरू मेडिकेट के मालिक माखन लाल बिंदरू, भागलपुर बिहार का गोलगप्पे वाला वीरेंद्र पासवान, आलूचीबाग की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर, जम्मू के दीपक चंद आदि शामिल हैं। 

हाल की घटनाएं

  • 12 मार्च : पुलवामा में सरपंच पर हमला, बाल-बाल बचे
  • 11 मार्च : कुलगाम के अडूरा में घर में घुसकर सरपंच शब्बीर अहमद मीर की हत्या
  • 10 मार्च : टेरिटोरियल आर्मी का जवान समीर अहमद मल्ला का शव सेब के बगीचे में मिला 
  • 10 मार्च : शोपियां के जैनापोरा में मंदिर में आग, आतंकी साजिश की आशंका, जांच शुरू 
  • नौ मार्च : श्रीनगर के खोनमुह में घर में घुसकर पीडीपी सरपंच समीर अहमद भट की हत्या 
  • दो मार्च : कुलगाम के कुलपोरा सरांड्रो में निर्दलीय पंच मो. याकूब डार की गोली मारकर हत्या  
  • दो मार्च : कुलगाम के हरिवेथ गांव में पंचायत घर को आतंकियों ने लगाई आग, भारी नुकसान
  • 28 फरवरी : श्रीनगर में नमाज पढ़कर घर लौट रहे एसीबी इंस्पेक्टर शेख फिरदौस को आतंकियों ने मस्जिद के बाहर मारी गोली

बडगाम में कश्मीर पंडित को गोली मारने की घटना के बाद पहुंचे सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर

साजिश को नाकाम करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति की गई है तैयार 

घाटी में टारगेट किलिंग से फैली दहशत के मद्देनजर सरकार ने पाकिस्तान प्रायोजित नई साजिश को कुचलने के लिए बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है। सीमा पार के हैंडलरों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पूरी घाटी में सुरक्षा बलों के जवान हाइब्रिड आतंकियों और उनके मददगारों पर प्रहार कर रहे हैं। खोज-खोजकर ऐसे देश-विरोधी तत्वों को निकाला जा रहा है। सरकारी महकमे में भी इनके हमदर्दों की तलाश की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तय रणनीति के अनुसार पूरी घाटी में संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले पत्थरबाजों, ओजीडब्ल्यू और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को गिरफ्तार कर टारगेट किलिंग करने वालों एवं उनके मददगारों में भय का माहौल पैदा होगा। 
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बडगाम में कश्मीर पंडित को गोली मारने की घटना के बाद पहुंचे सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के प्रयासों तथा उनकी संपत्तियों से कब्जे हटाने की कवायद के बीच पाकिस्तान ने फिर 90 जैसे हालात पैदा करने की साजिश रची है। कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर उन पर हमले कराने के साथ अब उनके मंदिरों को जलाने की कोशिश इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। नब्बे के दशक में भी इसी तरह हालात पैदा किए गए थे, जिसके बाद कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
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