प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट बोलने के लिए खड़े हुए तो भाजपा विधायकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपा की ओर से स्टेटहुड पर ड्रामेबाजी बंद करो समेत कई नारे लगाए गए। इसके जवाब में कांग्रेस विधायकों ने भाजपा की ओर चुनाव आयोग से संबंधित बैनर दिखाए।
हंगामा बढ़ने पर भाजपा के कुछ विधायक वेल में पहुंच गए और कांग्रेस विधायक के सामने प्रदर्शन करने लगे। स्थिति बिगड़ने पर मार्शलों ने भाजपा विधायकों अरविंद गुप्ता और रंधावा को सदन से बाहर किया। इसके अलावा इरफान हफीज लोन और इफ्तिखार चौधरी को भी मार्शलों की मदद से बाहर ले जाया गया।
इस दौरान सदन में दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच तीखी बहस भी हुई। कांग्रेस विधायक गुलाम अहमद मीर और भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी के बीच भी नोकझोंक हुई। कुछ टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के अन्य विधायक भी आमने-सामने आ गए।
वहीं, भाजपा विधायक अरविंद गुप्ता पर चर्चा के दौरान माइक उठाकर मारने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया गया। सदन में मौजूद सदस्यों ने एक-दूसरे पर अनुशासनहीनता और हंगामा करने के आरोप लगाए।
लगातार हंगामे के बीच राज्य के दर्जे की बहाली से संबंधित प्रस्ताव पर सदन में चर्चा आगे बढ़ी और अंत में प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इसके बाद भाजपा विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया।
प्रस्ताव को लेकर विधानसभा में पहले से ही सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच मतभेद बने हुए थे। भाजपा ने इसे लेकर विरोध दर्ज कराया था, जबकि सरकार और उसके सहयोगी दल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को सदन के माध्यम से आगे बढ़ाने के पक्ष में रहे।