विश्व कप फाइनल में कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाने और भारतीय क्रिकेट टीम की हार का जश्न मनाने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार सात छात्रों पर से आतंकवाद विरोधी कानून के हटाए जाने के बाद शनिवार को एक अदालत ने जमानत दे दी।
मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के शुहामा में शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट)-कश्मीर के छात्रों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) गांदरबल की अदालत ने छात्रों को जमानत दे दी। इसकी पुष्टि छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील शफीक अहमद भट ने दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को शनिवार देर शाम रिहा कर दिया गया।
वकील ने कहा कि छात्रों के खिलाफ यूएपीए के आरोप हटा दिए गए हैं। भट्ट ने कहा, पुलिस ने सीजेएम अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें यूएपीए के आरोप हटा दिए गए।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों के माता-पिता के आश्वासन के बाद विचार विमर्श के बाद यूएपीए के आरोप हटा दिए गए। कश्मीर पुलिस महानिरीक्षक वीके बिर्दी ने कहा कि छात्रों के माता-पिता ने आश्वासन दिया है कि उनके बच्चों से किसी और को कोई नुकसान नहीं होगा। इसके बाद जांच जारी रखने पर विचार किया गया।
पुलिस द्वारा एक गैर-स्थानीय छात्र की शिकायत की जांच शुरू करने के बाद छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने छात्रों पर यूएपीए की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया था, जो किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को उकसाने या सलाह देने से संबंधित है और सात साल की जेल की सजा है।
छात्रों पर आईपीसी की धारा 505 और 506 भी लगाई गईं, जो सार्वजनिक शरारत और आपराधिक धमकी से संबंधित हैं। इसके तहत दोषी पाए जाने पर जेल की सजा पांच साल तक हो सकती है। यूएपीए के तहत छात्रों पर मामला दर्ज करने की राजनीतिक दलों ने कड़ी आलोचना की थी। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, आखिरकार अच्छी समझदारी की जीत हुई और उनका भविष्य खतरे से बच गया।