संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सहीर राथर ने हाल ही में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में बांदीपोरा जिले को शामिल न किए जाने पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने समान क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और जिले की जनता की आकांक्षाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। जिले से तीन निर्वाचित विधायक होने के बावजूद, जिनमें दो सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और एक उसके गठबंधन दल से हैं, बांदीपोरा को मंत्रिपरिषद में कोई जगह नहीं मिली है। इस निर्णय से स्थानीय जनता में भारी असंतोष है और शासन में जिले के उचित स्थान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सहीर राथर ने कहा कि बांदीपोरा के लोग किसी विशेष अनुग्रह की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे निष्पक्षता, सम्मान और समान व्यवहार चाहते हैं। उनकी आकांक्षाओं और चिंताओं को सरकार के शीर्ष स्तर पर सुना जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व केवल पद हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिले के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसी प्राथमिकताओं को नीतिगत स्तर पर मजबूती से उठाने का एक माध्यम है।
सरकार और राजनीतिक नेतृत्व से जनभावनाओं का सम्मान करने का आह्वान करते हुए उन्होंने जिले के निर्वाचित प्रतिनिधियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता के हितों की पैरवी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बांदीपोरा जम्मू-कश्मीर का एक अभिन्न अंग है और इसे राजनीतिक रूप से उपेक्षित महसूस नहीं कराया जाना चाहिए। उनकी मांग स्पष्ट है कि निष्पक्ष प्रतिनिधित्व, समावेशी शासन और हर क्षेत्र का समान सम्मान सुनिश्चित हो। उन्होंने लोकतांत्रिक और रचनात्मक तरीकों से बांदीपोरा की आवाज उठाते रहने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि जिले को विकास की दौड़ में पीछे नहीं छूटने दिया जाएगा।