प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने छह जून तक फैसला लिए जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनके हाथ निराशा लगी है। पीएम पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों की एक ही मांग है कि उन्हें सुरक्षित जगह पर नौकरी करने के लिए भेजा जाए।
कश्मीर में एक बार फिर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने घाटी से बाहर स्थानांतरित किए जाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। रविवार को बडगाम के शेखपोरा में पीएम पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने छह जून तक फैसला लिए जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनके हाथ निराशा लगी है। ऐसे में मांग पूरी होने तक उनके विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि घाटी से कई कश्मीरी पंडित और अन्य डोगरा कर्मचारी जम्मू के लिए पलायन कर चुके हैं। कुछ पंडित परिवार अब भी अलग-अलग कॉलोनी में रह रहे हैं और वे अपनी मांग के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
प्रदर्शन में शामिल एक कश्मीरी पंडित ने कहा कि सरकार उन्हें सब्र रखने के लिए कहती है, लेकिन शायद वह चाहते हैं कि एक राहुल गया और जब तक और दस नहीं जाते तब तक वो आश्वासन ही देते रहेंगे। सरकार खोखले दावे करती है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनकी एक ही मांग है कि उन्हें घाटी से बाहर सुरक्षित स्थानों पर तैनाती दी जाए। साथ ही जो असांविधानिक बांड लिखवाया गया है, उसे रद्द किया जाए।
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पीएम पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों की एक ही मांग है कि उन्हें सुरक्षित जगह पर नौकरी करने के लिए भेजा जाए। उनका कहना है कि हम सरकार पर भरोसा करते हुए यहां नौकरियां करने आए थे लेकिन यह नहीं पता था कि हमें यह सब झेलना पड़ेगा।
कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारी राहुल भट की हत्या के कश्मीरी पंडित विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद घाटी में हुई एक के बाद एक टारगेट किलिंग को लेकर कश्मीर सहित जम्मू में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए। कश्मीरी पंडित सहित अन्य अल्पसंख्यक कर्मचारी भी घाटी से बाहर तैनाती किए जाने की मांग कर रहे हैं।