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Srinagar News: हाईकोर्ट ने अपहरण की एफआईआर रद्द करने से किया इन्कार

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- कहा- शादीशुदा महिला को बहला-फुसलाकर ले जाना अपराध है
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। अपहरण के एक मामले में एफआईआर रद्द करने से इन्कार करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शादीशुदा महिला को नाजायज रिश्ते के लिए बहला-फुसलाकर ले जाना भारतीय न्याय संहिता की धारा 84 के तहत दंडनीय अपराध है। पहली शादी खत्म किए बिना दूसरी शादी करना बीएनएस की धारा 82 के तहत ''बिगेमी (दो शादियां करना) हो सकता है।
जस्टिस एमए चौधरी की बेंच ने अपहरण के कथित मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए ये बातें कहीं। कोर्ट ने माना कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का पता चलता है और इसके लिए पूरी जांच की जरूरत है।
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यह याचिका बारामुला की रहने वाली रुखसाना बानो और पश्चिमी दिल्ली के निखिल चोकर ने दायर की थी जिसमें पुलिस की ओर से बीएनएस की धारा 87 और 49 के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार बालिग महिला रुखसाना ने अपनी मर्जी से कश्मीर छोड़ा था। उसने आरोप लगाया कि उसके रिश्तेदारों और पहले पति के परिवार ने उसके साथ मारपीट की, उसे धमकाया और जबरन शादी कराई थी। उसने दावा किया कि वह दोस्तों की मदद से भागी, अपनी मर्जी से नई दिल्ली गई और किसी ने उसका अपहरण नहीं किया था।
शिकायतकर्ता जो रुखसाना के पहले पति के पिता हैं, ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि रुखसाना की कानूनी तौर पर उनके बेटे से शादी हुई थी और सह-याचिकाकर्ता निखिल चोकर के कहने पर दो स्थानीय लोगों की मदद से उसे उसके ससुराल से अगवा किया गया था।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वर्चुअल तरीके से रुखसाना का बयान दर्ज किया। उसने कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ था। वह अपनी मर्जी से दिल्ली में रह रही थी, उसे डर था कि अगर वह कश्मीर लौटी तो उसकी जान को खतरा हो सकता है और वह अपने पहले पति से तलाक लेना चाहती थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके पति के साथ उसकी शादी जबरन कराई गई थी।
पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कोर्ट को बताया कि रुखसाना ने फोन पर कहा था कि वह अपनी मर्जी से दिल्ली गई थी और सुरक्षा कारणों से वहीं अपना बयान दर्ज कराना चाहती थी। जांच एजेंसी ने कहा कि हाईकोर्ट से मिली अंतरिम रोक की वजह से जांच पूरी नहीं हो पाई थी और उन्होंने जांच जारी रखने की इजाजत मांगी।
कोर्ट ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेज पर भी गौर किया जिनमें आर्य समाज का शादी का सर्टिफिकेट और तस्वीरें शामिल थीं। इनसे पता चलता है कि रुखसाना ने कथित तौर पर 28 मई, 2025 को दिल्ली में निखिल चोकर से शादी की थी, जबकि बारामुला के रहने वाले व्यक्ति के साथ उसकी पहली शादी अभी भी कायम थी।
कोर्ट ने कहा कि अगर पहली शादी खत्म किए बिना दूसरी शादी की जाती है, तो यह बीएनएस की धारा 82 के तहत ''''बिगेमी'''' (एक से ज्यादा शादी करने) का अपराध भी माना जाएगा।
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यह मानते हुए कि शिकायत को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता जिसके आधार पर एफआईआर रद्द की जाए। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और जांच पर लगी अंतरिम रोक हटा दी। साथ ही, कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच एजेंसी रुखसाना की निजी सुरक्षा को लेकर उसकी आशंका को ध्यान में रखते हुए ऐसी जगह पर उसका बयान दर्ज कर सकती है जहां वह सुरक्षित महसूस करे, और कानून के अनुसार जांच आगे बढ़ा सकती है।
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