विधायक सितारगंज एवं पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा रविवार को अपने पैतृक गांव बुघाणी पहुंचे। इससे पूर्व उन्होंने देवलगढ़ स्थित गौरा देवी और राज राजेश्वरी मंदिर में पत्नी के साथ पूजा-अर्चना की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय एनएच बहुगुणा के पोते और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ ने
राजनीति में कदम रखा है, जिसके लिए वह कुलदेवी और गांव वालों का आशीर्वाद लेने पहुंचे। देवलगढ़ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद वह अपने पैतृक गांव बुघाणी आए। जहां ग्रामीणों ने स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने बहुगुणा स्मारक का भी निरीक्षण किया।
इस मौके पर ग्रामीणों ने उनके समक्ष समस्याएं भी रखी, जिनके समाधान के लिए सौरभ बहुगुणा ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से फोन पर वार्ता की। राज राजेश्वरी मंदिर के पुजारी कुुंजिका प्रसाद उनियाल ने देवलगढ़ पर्यटन सर्किट और देहरादून से वाया बुघाणी खिर्सू तक बस सेवा की मांग की।
सौरभ ने तत्काल उत्तराखंड परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक से बात करते हुए कार्रवाई करने को कहा। सौरभ ने स्मारक की एप्रोच रोड की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने फोन पर लोनिवि के अधिशासी अभियंता से वार्ता करते हुए 10 दिन के भीतर दुरुस्त करने के लिए कहा। इस मौैके पर भाजपा जिला महामंत्री विकास कुकरेती, मनोज जोशी, जितेंद्र रावत, सुधीर बहुगुणा और अनूप बहुगुणा आदि मौजूद थे।
पूर्व मुख्यमंत्रियों के गांव में पानी का संकट
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मुख्यमंत्री देने वाले पौड़ी जिले का बुघाणी गांव पलायन और पानी के संकट से जूझ रहा है। कभी गांव में 80-85 परिवार रहते थे। अब 7-8 परिवार बचे थे। ग्रामीणों के नाम पर बुजुर्ग लोग ही शेष हैं। शिक्षा, पानी और स्वास्थ्य की समस्या को देखते हुए यहां के लोग अन्यत्र बस गए हैं।
ऐसी स्थिति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की तीसरी पीढ़ी के रुप में सौरभ ग्रामीणों के बीच उम्मीद की किरण बनकर पहुंचे। ग्रामीण सौरभ को समस्या बताते गए और वह तत्काल अधिकारियों से फोन पर वार्ता करते हुए समाधान के निर्देश देते रहे। स्थानीय निवासी रमा बहुगुणा, राधा उनियाल, सिद्धेश्वरी उनियाल, सुशीला बहुगुणा और कादबंरी डंगवाल ने बताया कि बुढ़ापे में उन्हें गांव से काफी दूर स्थित प्राकृतिक पेयजल स्रोतों से पानी लाना पड़ता है। दादा के समान उन्हें पोते से उम्मीद है। उन्हें खुशी है कि बहुगुणा के परिवार से विधायक बने हैं। अब गांव की समस्याएं हल हो सकेंगी।
कल्या के लगे गले
श्रीनगर। सौरभ अपने दादा के दोस्त कल्या (कालू) के बार-बार गले मिले। स्व. एचएन बहुगुणा का भी बचपन का नाम कल्या था। जब भी वह गांव आते कालू को पूछते और उनको कुछ न कुछ दे जाते। सौरभ ने भी ऐसा ही किया।