होनहार बेटियां देश की तस्वीर भी हैं और तकदीर भी हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय में छात्राओं की संख्या छात्रों के मुकाबले अधिक है। गोल्ड मेडल और खिताब जीतने में भी 65 फीसदी छात्राएं हैं। ये बातें देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कश्मीर विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि आज स्टेज पर मेडल पाने वाले 21 मेधावियों में से भी 17 छात्राएं रहीं, जो दो तिहाई से भी अधिक हैं। इसके लिए उन्होंने छात्राओं को मुबारकबाद दीं।
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ये होनहार बेटियां देश की तस्वीर भी हैं और तकदीर भी हैं। हमारे देश की महिलाएं और लड़कियां नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के जरिये भविष्य में देश की राजनीति में और भी बड़ी भागीदारी निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। ये अधिनियम महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगा। वहीं, प्रेसिडेंट ने अपने भाषण की शुरुआत में 'यि छू मौज कशीर' कह कर संबोधन किया, जिस पर हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
आगे अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि कश्मीर विश्वविद्यालय के इस खूबसूरत कैंपस में तालीम हासिल करना और तालीम देने का अवसर मिलना खुशकिस्मती है। इस विश्वविद्यालय ने देश को एक से बढ़ एक होनहार नागरिक दिए हैं। हजरतबल की रहमत हमेशा इसपर बनी रहें।
महामहिम ने कहा कि कुदरत ने कश्मीर को बेपनाह खूबसूरती दी है। अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथी सामाजिक कार्य में भागीदारी करें। उन्होंने दीक्षांत समारोह में शामिल सभी छात्रों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसा काम करें जिससे देश, परिवार, विश्वविद्यालय का नाम रोशन हो।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश को कश्मीर के जिम्मेदार युवाओं पर गर्व है। उन्होंने कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्रों से अपनी पढ़ाई के साथ-साथ समाज सेवा में भी सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वे सामाजिक बदलाव ला सकते हैं और एक मिसाल कायम कर सकते हैं. उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि पूर्व छात्रों ने देश की सेवा करके इस विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।
कश्मीर विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य जिसका अर्थ है 'आइए हम अंधकार से प्रकाश की ओर चलें' का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जितना अधिक हमारे युवा शिक्षा के प्रकाश की ओर, शांति के प्रकाश की ओर बढ़ेंगे, उतना ही हमारा देश प्रगति करेगा। उन्होंने कहा कि जिस समाज और देश के युवा विकास और अनुशासन के मार्ग पर चलते हैं, वह समाज और देश प्रगति और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता है।
सतत विकास के बारे में बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सतत विकास की सीख कश्मीर की विरासत का हिस्सा है। उन्होंने एक कहावत का हवाला दिया जिसका अर्थ है 'जब तक वन हैं तब तक अन्न है।' और कहा कि पृथ्वी पर इस स्वर्ग को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कश्मीर विश्वविद्यालय से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि ग्लेशियोलॉजी, जैव विविधता संरक्षण और हिमालयन आइस-कोर प्रयोगशाला से संबंधित कार्य विभिन्न चरणों में हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय ऐसे सभी क्षेत्रों में तीव्र गति से कार्य करेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर जोर दिया गया है। यदि हमारे युवाओं को भारतीय ज्ञान प्रणालियों के बारे में अच्छी जानकारी दी जाए तो उन्हें कई प्रेरक उदाहरण मिलेंगे। लगभग 1200 वर्ष पूर्व श्रीनगर शहर को झेलम की बाढ़ से बचाने के लिए एक विशेषज्ञ सुय्या ने जो कार्य किया उसे हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में ज्ञान-विज्ञान के हर क्षेत्र में अमूल्य खजाना है। आज की परिस्थितियों में ऐसी जैविक रूप से विकसित ज्ञान प्रणालियों का पुन: उपयोग करने के तरीके खोजना अकादमिक जगत की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, विश्वविद्यालय वीसी प्रोफेसर नीलोफर खान, उपराज्यपाल सलाहकार राजीव राय भटनागर, जम्मू कश्मीर पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह व अन्य गणमान्य लोग और विद्यार्थी भी मौजूद रहे।