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कश्मीर: श्रीनगर के डाउनटाउन में तीन दशक बाद खुला डीएवी स्कूल, अदालत के फैसले के बाद हटा कब्जा

Fri, 15 Sep 2023 10:24 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

1958 में श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में नेशनल पब्लिक स्कूल चलता था। यह आर्य समाज की संपत्ति है। 90 के दशक के बाद यहां पर नक्शबंद पब्लिक हाई स्कूल चल रहा था। खाली इमारत देख अवैध कब्जा कर लिया गया।
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श्रीनगर डीएवी स्कूल - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में करीब तीन दशक बाद दयानंद आर्य विद्यालय (डीएवी) महाराजगंज से कब्जा हटाया गया। पहले यहां डीएवी रैनावारी और देवकी आर्य पुत्री पाठशाला चलाते थे। बता दें कि यहां आर्य समाज के अधिकतर स्कूल थे, लेकिन 90 के दशक के बाद सब बंद हो गए। केवल दो चल रहे हैं। अब इस तीसरे स्कूल को प्रबंधन ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोबारा शुरू किया है।

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स्कूल की प्रिंसिपल समीना जावेद ने कहा, 1958 में यहां पर नेशनल पब्लिक स्कूल चलता था। यह आर्य समाज की संपत्ति है। 90 के दशक के बाद यहां पर नक्शबंद पब्लिक हाई स्कूल चल रहा था। खाली इमारत देख अवैध कब्जा किया गया। 30 वर्षों तक कब्जा रहा। कोई किराया भी नहीं दिया। इसके बाद प्रबंधन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और अक्तूबर 2022 में इमारत को सील कर दिया।

प्रबंधन का स्कूल को खोलने का कोई प्लान नहीं था, लेकिन एक दिन जब प्रबंधन के कुछ लोग साइट विजिट के लिए आए, तो वहां जुमे की नमाज के बाद लोगों ने उनसे अनुरोध किया कि यहां दोबारा से स्कूल खोला जाए। समीना ने बताया कि मार्च 2023 में प्रबंधन ने हमसे इस स्कूल को दोबारा से खोलने के लिए तैयार रहने के लिए कहा।
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उन्होंने कहा, केवल 30 बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसे दोबारा शुरू किया गया। देखा जाए तो स्कूल घाटे में है। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों का वेतन स्कूल प्रबंधन खुद से देता है। यह स्कूल अभी पांचवीं कक्षा तक है। जो ऊपरी कक्षा के बच्चे थे, उन्हें डीएवी रैनावारी भेज दिया गया।

जिनके दो बच्चे पढ़ रहे, उन्हें पचास प्रतिशत छूट

समीना ने बताया कि यहां जितने भी बच्चे पढ़ रहे हैं, वह गरीब परिवार से हैं। जो फीस उनकी नक्शबंद स्कूल में थी, उससे कम ही हमने निर्धारित की है। उन्होंने कहा, हमने वार्षिक फीस केवल 1200 और मासिक 700 रुपये रखी है। फिर भी अधिकतर लोग दो-दो, तीन-तीन महीने तक फीस नहीं दे पाते। जिनके दो बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं, उन्हें एक बच्चे को पचास प्रतिशत छूट दी जा रही है। इसी तरह जिनके तीन बच्चे हैं, उनके एक बच्चे को मुफ्त पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। हम किसी पर दबाव नहीं डाल रहे हैं। आठ कमरों वाले इस स्कूल में पांच शिक्षक और एक हेल्पर हैं।

धर्मनिरपेक्ष माहौल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल कर रहे बच्चे

समीना ने बताया कि शुरू में स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिला। उनका भरोसा जीतने में समय लगा। अब लोग सहयोग कर रहे हैं। स्थानीय निवासी बशीर अहमद ने कहा कि स्कूल के बंद होने के बाद से बच्चों का भविष्य दाव पर लग गया था। हमने अनुरोध किया कि स्कूल को खोला जाए। स्कूल की प्रिंसिपल समीना कहती हैं कि उनका उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष माहौल में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा, अक्सर देखा गया है कि बच्चों को सुबह की प्रार्थना में कुरान या आरती पढ़ाई जाती है। हम ऐसा कुछ नहीं करते। इससे बच्चों को यह नहीं लगता कि धर्म के आधार पर स्कूल का संचालन हो रहा है।

अभिभावकों के आग्रह पर लिया निर्णय

आर्य प्रतिनिधि सभा के उप प्रधान तेज कृष्ण ने कहा, स्कूल को खोलने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन जब बच्चों के अभिभावकों ने आग्रह किया, तो सोचा कि उन मासूमों के साथ नाइंसाफी होगी। दशकों तक इस स्कूल पर कब्ज़ा रहने के बाद अदालत के निर्देश पर इसे खाली करवाया गया। स्कूल में गरीब परिवार के बच्चों के होने के चलते हमने फीस काफी कम रखी है।

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