सिर्फ बारिश नहीं, पर्यावरण की अनदेखी और कागजी एनओसी ने बढ़ाई मुसीबत
स्थानीय विधायक और विशेषज्ञों ने दी बड़ी तबाही की चेतावनी
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हाल ही में कुछ दिन पहले आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने एक बार फिर कुदरत के साथ खिलवाड़ और नियमों को ताक पर रखकर किए गए अंधाधुंध निर्माण की पोल खोलकर रख दी है। लिद्दर नदी के बिल्कुल मुहाने पर बने कई आलीशान होटलों, गेस्ट हाउसों और व्यावसायिक इमारतों को इस सैलाब का सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। इसके तबाही के मंजर अभी भी देखने को मिलेंगे।
रिसॉर्ट में जो मंजर देखने को मिला, वह सिर्फ भारी बारिश या बादल फटने का नतीजा नहीं था। इसने सालों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर कानूनी प्रवर्तन और अनियंत्रित निर्माण को भी बेनकाब कर दिया है, जिसने नदी के प्राकृतिक रास्ते को सिकोड़ कर पर्यटकों और स्थानीय निवासियों दोनों की जान को जोखिम में डाल दिया है।
बाढ़ की सबसे भीषण मार द पहलगाम शोर, द पहलगाम डेज, द इडिल और द पहलगाम स्टैग जैसे नामी होटलों पर पड़ी, जहां लिद्दर नदी का उफनता पानी कमरों, लॉबी और अन्य हिस्सों में घुस गया।
इसके अलावा, नदी के बहाव क्षेत्र में आने वाले कई घर, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह जलमग्न हो गए। इसके बाद प्रशासन को आनन-फानन में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पर एक बेहद चिंताजनक पैटर्न सामने आता है। नदी के ईको-सिस्टम को बचाने और बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए तय किए गए ''बफर जोन'' के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कई होटल नदी से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर खड़े हैं।
पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए इन ढांचों ने नदी के बाढ़-मैदानों को छोटा कर दिया है, जिससे अचानक पानी बढ़ने पर नदी के पास फैलने की जगह ही नहीं बची। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि व्यावसायिक हितों को तरजीह देने के लिए सालों तक नियमों को नजरअंदाज किया गया। गत शनिवार को इसकी कीमत पर्यटकों को चुकानी पड़ी, जो डूबते होटलों से बाल-बाल बचे। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर पानी का स्तर थोड़ा और बढ़ जाता या यह बाढ़ रात के वक्त आती तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते थे।
पहलगाम से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अल्ताफ अहमद वानी ने भी स्वीकार किया कि प्रकृति के साथ बड़े पैमाने पर हुई छेड़छाड़ ने इस स्थिति को बदतर बना दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह पर्यावरणीय गिरावट आने वाले समय में एक बड़ी त्रासदी को निमंत्रण देगी।
इस पूरे मामले पर पर्यावरण विशेषज्ञ फैजान का कहना है कि सरकार को नदी किनारों और पहाड़ी जल निकासी गलियारों (माउंटेन ड्रेनेज कॉरिडोर्स) के पास चल रहे निर्माण कार्यों पर कड़ी नजर रखने की सख्त जरूरत है। ये क्षेत्र प्राकृतिक नाले के रूप में काम करते हैं, जो भारी बारिश या बादल फटने के दौरान अतिरिक्त पानी को सुरक्षित रूप से बाहर ले जाते हैं। भले ही ये साल के अधिकांश समय सूखे या हानि रहित दिखते हों लेकिन खराब मौसम में ये अचानक विनाशकारी बाढ़ के रास्ते में तब्दील हो जाते हैं। हालांकि ऐसी जमीन व्यावसायिक रूप से अधिक कीमती होती है क्योंकि ''रिवर-व्यू'' वाले होटलों की मांग ज्यादा होती है, लेकिन ये स्थान अचानक आने वाली बाढ़, मलबे के बहाव और कटाव के सबसे बड़े जोखिम वाले क्षेत्र भी हैं। भविष्य के खतरों को कम करने के लिए वैज्ञानिक भूमि-उपयोग योजना (लैंड-यूज प्लानिंग) और सख्त नियम ही एकमात्र रास्ता है।
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लिद्दर नदी के दोनों किनारों पर 200 मीटर तक निर्माण पर रोक
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने पहलगाम के पर्यावरण संरक्षण को लेकर 2013 में एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता को कड़ा निर्देश दिया है कि वे प्रसिद्ध लिद्दर नदी के दोनों तरफ करीब 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित करें। न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह और न्यायमूर्ति मुजफ्फर हुसैन अत्तार की खंडपीठ ने यह आदेश ''पहलगाम पीपल्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन'' द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। वहीं, पहलगाम के कई हितधारकों का कहना है कि यह निर्देश केवल कागजों तक ही सीमित है। जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है।
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अगर नियमों का उल्लंघन हुआ तो उसके लिए जांच की जाएगी : एसीडी अनंतनाग
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के एसीडी शफीक वानी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि नियमों के अनुसार चिह्नित क्षेत्रों से 200 मीटर की दूरी पर ही निर्माण कार्य की अनुमति है, लेकिन हालिया घटना के बाद नियमों के उल्लंघन की बात सामने आ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की पूरी जांच करवाएंगे कि निर्माण कार्यों के लिए पहलगाम डेवलपमेंट अथॉरिटी ने अनुमति दी थी या किसी अन्य कमेटी ने। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच करने के बाद यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो प्रशासन की ओर से अवैध निर्माण के खिलाफ एक विशेष और सख्त अभियान चलाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।