श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय ने पिछले साल श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में एक मुठभेड़ में मारे गए चार व्यक्तियों में से एक आमिर लतीफ माग्रे के शव को निकालने के संबंध में अपने एकल पीठ के फैसले पर शुक्रवार को रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे और न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर सरकार के महाधिवक्ता डीसी रैना को सुनने के बाद कहा कि बेंच के समक्ष सुनवाई की अगली तारीख 28 जून होगी। तब तक फैसले के संचालन पर रोक रहेगी। आमिर के पिता की ओर से अधिवक्ता दीपिका सिंह राजावत जम्मू से वर्चुअल मोड के माध्यम से पेश हुईं। खंडपीठ ने अधिवक्ता रजावत को सरकार द्वारा दायर अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा।
महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा था कि एकल न्यायाधीश द्वारा दी गई राहत चिकित्सा विज्ञान विश्लेषण के संदर्भ में नहीं दी जा सकती थी क्योंकि शव एक महीने की अवधि के बाद ही सड़ जाता है। यह भी प्रस्तुत किया कि आमिर के पिता मोहम्मद लतीफ माग्रे ने अदालत की एकल पीठ द्वारा दी गई राहत के लिए प्रार्थना नहीं की थी और इसलिए राहत रिकॉर्ड पर दलीलों से परे थी। महाधिवक्ता ने प्रस्तुत किया कि निर्णय खुद विरोधाभासी है क्योंकि एक ओर तो सड़न को इंगित करते हुए बिना समय बर्बाद किए तत्परता से काम करने को कहा तो दूसरी ओर शव को निकालने का निर्देश देकर एक विपरीत दृष्टिकोण लिया है। दूसरी ओर अधिवक्ता रजावत ने कहा कि परिवार नश्वर अवशेषों की मांग करता है जो उसका सांविधानिक अधिकार है। कहा कि परिवार को 5 लाख रुपये नहीं चाहिए लेकिन नश्वर अवशेष पाना मौलिक अधिकार है। ज्ञात हो कि 27 मई को एकल पीठ ने उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के कब्रिस्तान से आमिर के शरीर को निकालने का आदेश दिया था।