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हुर्रियत की बंद की कॉल का ज़्यादा प्रभाव नहीं दिखा

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श्रीनगर। घाटी में अब अलगाववादियों का वजूद लगभग खत्म हो गया है। अब लोग उसकी कॉल की अनसुनी करने लगे हैं। मौलवी मोहम्मद फारूक और अब्दुल गनी लोन की पुण्यतिथि पर मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाली हुर्रियत कांफ्रें स ने बंद का आह्वान किया था, लेकिन ज्यादातर इलाकों में बाजार खुलीं रहीं। सड़कों पर ट्रैफिक सामान्य दिनों की तरह रहा। इस बीच बंद को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे।
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कश्मीर में बंद के आह्वान का शनिवार को ज़्यादा असर नहीं दिखा। श्रीनगर के मायसूमा के साथ-साथ डाउनटाउन के कुछ इलाकों में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे, लेकिन बाकी सभी जगह जनजीवन सामान्य रहा। डल झील के इलाके में सभी दुकानें रोज की तरह खुलीं रहीं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले लगभग तीन साल में अलगाववादियों की आवाज को घाटी में बहुत अधिक तवज्जो नहीं मिल रही है। न तो उनकी ओर से धड़ल्ले से बंद का आह्वान किया जा रहा है और न पथराव की घटनाएं आम रही हैं। कई बार अलगाववादियों ने भड़काने का भी प्रयास किया। पोस्टर चिपकाए गए, पर आम लोगों में इसका कोई असर नहीं देखने को मिला।
ज्ञात हो कि हुर्रियत के प्रमुख नेता अब्दुल गनी लोन की 2002 में कश्मीर के पूर्व मीरवाइज मौलवी मोहम्मद फारूक की पुण्यतिथि के अवसर पर एक रैली के दौरान श्रीनगर में हत्या कर दी गई थी। हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के पिता मौलवी फारूक की 1990 में हत्या कर दी गई थी।
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पीडीपी ने मीरवाइज और लोन को दी श्रद्धांजलि
श्रीनगर। पीडीपी ने दिवंगत मीरवाइज मौलवी फारूक और अब्दुल गनी लोन को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीडीपी द्वारा जारी एक बयान में पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष में मीरवाइज और लोन की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा, इन दोनों नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को कम करने के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कहा कि राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल ने हमें हजारों घाव दिए हैं, जिन्हें ठीक होने में कई साल लगेंगे। इन नेताओं को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि कश्मीर मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान होगा। पीडीपी के उपाध्यक्ष एआर वीरी, महासचिव गुलाम नबी लोन हंजुरा, डॉ. महबूब बेग, वरिष्ठ नेता नईम अख्तर और मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने भी दिवंगत मीरवाइज और लोन को श्रद्धांजलि दी है।
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