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आमिर के शव की वापसी पर फैसला सुरक्षित

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श्रीनगर। श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में एक मुठभेड़ में मारे गए चार व्यक्तियों में एक आमिर माग्रे का शव परिवार को सौंपे जाने की याचिका पर जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने वीरवार को फैसला सुरक्षित रख लिया है। आमिर के पिता मोहम्मद लतीफ माग्रे ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेटे के शव को अच्छे ढंग से दफनाने के लिए वापस करने की मांग की थी।
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न्यायमूर्ति संजीव कुमार की पीठ ने लगातार तीन दिनों तक याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। हाईकोर्ट ने रामबन निवासी लतीफ माग्रे की ओर से पेश वकील दीपिका रजावत की याचिका पर 12 जनवरी 2022 को गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में आग्रह किया गया था कि शव सौंपने में देरी से परिवार के सदस्य मानसिक रूप से आहत होंगे। उन्होंने कहा कि देरी चिकित्सकीय रूप से भी व्यावहारिक नहीं है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर सरकार और पुलिस ने आपत्तियां दर्ज कीं। 27 अप्रैल को देश के सहायक सॉलिसिटर जनरल टीएम शम्सी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा था कि इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से कोई अलग आपत्ति दर्ज करने का निर्देश नहीं है। साथ ही कहा कि मामले में जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा दायर आपत्तियों को ही गृह मंत्रालय की भी आपत्तियां मान लिया जाए। कोर्ट ने अर्जी मंजूर कर ली थी। लतीफ ने 7 दिसंबर 2021 को उपराज्यपाल से मुलाकात कर शव की वापसी और मजिस्ट्रियल जांच को सार्वजनिक करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता लतीफ ने कहा कि वह और उसकी पत्नी दुखी और बेचैन हैं क्योंकि अधिकारियों ने उन्हें आखिरी बार अपने बेटे का चेहरा देखने का मौका भी नहीं दिया है।
मालूम हो कि श्रीनगर के बाहरी इलाके हैदरपोरा में 18 नवंबर को हुई एक मुठभेड़ में मकान का मालिक, एक डॉक्टर और उनके पास काम करने वाले आमिर माग्रे समेत चार लोग मारे गए थे। इसमें मकान मालिक और डॉक्टर का शव बाद में उनके परिवार को सौंप दिए गए, जबकि आमिर का शव मांग रहे पिता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
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बिलाल का साथी था आमिर
एसआईटी के प्रमुख डीआईजी सुजीत के सिंह ने इस साल की शुरुआत में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि इस मुठभेड़ की जांच से पता चला है कि आमिर विदेशी आतंकी बिलाल भाई के साथ निकटता से जुड़ा था, जो इस ऑपरेशन के दौरान भागते समय मारा गया था।
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