श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी गरिमा और पहचान पर हमले का मुकाबला करने के लिए एकजुट होना होगा। अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर जिन हालात से गुजर रहा है, उसमें कोई रास्ता नहीं बचा है। ये हालात मांग कर रहे हैं कि गुर्जर, पहाड़ी, कश्मीरी, युवा, महिलाएं हम सब एकजुट हों।
अपने आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें लोगों को शक्तिहीन करने के प्रयास भी शामिल हैं। 370 हटने के बाद स्थिति यह है कि यहां जमीन (स्थानीय लोगों की जोत) को खत्म करने के मकसद से कानून लाए जा रहे हैं। भूमि सौदों पर स्टांप शुल्क हटाने के पीछे के उद्देश्य को हमें समझना होगा। कई सरकारी कर्मचारियों पर आतंकियों से संबंध के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह बिना किसी सबूत के किया जाता है। प्रभावित कर्मचारी अदालत का दरवाजा खटखटाने से डरते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है क्योंकि प्रशासन इन नौकरियों के लिए आवेदन करने के लिए बाहर से लोगों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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मस्जिदों को हटाने से समस्या का समाधान होता है तो करने दें
महबूबा ने दावा किया कि देश के बाकी हिस्सों में मुसलमानों की स्थिति कश्मीरियों से भी बदतर है। मुसलमानों पर हमले हो रहे हैं और हमले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। हमारी मस्जिदों पर हमले हो रहे हैं। अब वे ताजमहल को भी मंदिर में बदलने की बात कर रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है? एक सुनियोजित तरीके से मुसलमानों के धर्मस्थलों और मुगलों द्वारा बनाए गए ऐतिहासिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा था। कभी बाबरी मस्जिद, कभी ताज महल, कभी कोई और मस्जिद को तोड़ने की बात की जाती है। कहा कि हम सड़क के किनारे कहीं भी प्रार्थना कर सकते हैं। हमें इबादत करने के लिए किसी इमारत की जरूरत नहीं है। अगर मस्जिदों को हटाने से समस्या का समाधान होता है तो उन्हें करने दो, लेकिन हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे को ख़त्म न करो, मुल्क का जो संविधान है उसे बर्बाद न करो।
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श्रीलंका की घटनाओं से सबक ले भाजपा
उन्होंने आईपीसी की धारा 124-ए (देशद्रोह कानून) पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, यदि कोई छात्र, कार्यकर्ता या राजनेता बोलता है, तो उनके खिलाफ देशद्रोह कानून का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए अगर इसे अभी नहीं रोका गया तो हमारी स्थिति श्रीलंका से भी बदतर हो जाएगी। इस अति-राष्ट्रवाद ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया है। मुफ्ती ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भाजपा श्रीलंका की घटनाओं से सबक ले सकती है और आज प्रचलित सांप्रदायिक तनाव और बहुसंख्यकवाद को रोक सकती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका इस स्थिति में है क्योंकि वे कई वर्षों तक धर्म के मुद्दे को उठाते रहे, एक ही परिवार के सदस्य लोगों पर शासन करते रहते हैं। जिस तरह से भाजपा पिछले आठ सालों से इस देश पर राज कर रही है और हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को हवा दे रही है।
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अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले
देश के कुछ हिस्सों में मुसलमानों के घरों में बुलडोजर चलाए जाने की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए मुफ्ती ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अल्पसंख्यकों पर हमला किया जा रहा है और उनके घरों को बुलडोजर से उड़ाया जा रहा है, उनकी जान को खतरा है। न्यायपालिका इन घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेने के लिए आगे नहीं आ रही है। इस बीच यासीन मलिक से संबंधित एक सवाल के जवाब में महबूबा ने कहा कि यह अभी भी एक विचाराधीन मामला है और जिस तरह से अल्पसंख्यकों पर हमला किया जा रहा है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।