श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सात नई सीटों के निर्धारण के साथ 19 निर्वाचन हलकों के नाम बदलने की सिफारिश की गई है। वहीं, दर्जनों सीटों के निर्धारण में व्यापक बदलाव किए गए हैं। अकेले जम्मू संभाग में ही विधानसभा की 17 सीटों का निर्धारण नए सिरे से किया गया है। इसी तरह से कश्मीर घाटी में भी कई सीटों के पुराने स्वरूप को बदल दिया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों से विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं।
कश्मीर संभाग में कश्मीरी पंडितों के नाम से जानी जाने वाली हब्बा कदल समेत दस सीटों का नाम बदला गया है। वहीं श्रीनगर जिले में खान्यार, सोनवार और हजरतबल सीटों को छोड़ अन्य सभी सीटों को या तो दूसरी सीटों में मिला दिया गया है या फिर नए सिरे से प्रस्तावित की गई हैं। इसी तरह से लोकसभा सीटों के निर्धारण पर भी सवाल उठ रहे हैं। आयोग ने जम्मू संभाग के दो मुस्लिम बहुल जिलों राजोरी और पुंछ को अनंतनाग संसदीय क्षेत्र से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। लिहाजा अनंतनाग-राजोरी सीट का क्षेत्र अब राजोरी, पुंछ, अनंतनाग और कुलगाम जिलों तक प्रस्तावित किया गया है। वहीं, श्रीनगर लोकसभा सीट पूर्ववर्ती तीन जिलों की जगह अब पांच जिलों तक फैली होगी। प्रदेश में यह निर्वाचन क्षेत्र 26.77 लाख की आबादी के साथ जनसंख्या के लिहाज से सबसे बड़ा होगा। इसमें गांदरबल जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों के अलावा श्रीनगर जिले के आठ, बडगाम के तीन, पुलवामा के चार और शोपियां जिले का एक विधानसभा क्षेत्र शामिल किया गया है। उधर, जम्मू लोकसभा क्षेत्र जम्मू, सांबा और रियासी जिले जबकि उधमपुर संसदीय क्षेत्र में उधमपुर, किश्तवाड़, डोडा, रामबन और कठुआ जिले होंगे। उत्तरी कश्मीर की बारामुला संसदीय सीट बडगाम, बारामुला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिले होंगे।
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कश्मीरी नेता बोले - किसी हाल में प्रस्ताव मंजूर नहीं
नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि पार्टी परिसीमन आयोग का यह मसौदा और प्रस्ताव किसी हाल में मंजूर नहीं है। नेकां जल्द ही इस मामले पर विस्तृत रूप से आपत्ति दर्ज करवाएगी। वहीं, पीडीपी के एक नेता ने कहा कि परिसीमन की अंतरिम रिपोर्ट जनसांख्यिकीय बदलाव से प्रेरित है। पहले चरण में सियासी बदलाव लाना मकसद है और फिर इसे जमीनी स्तर पर बदलने की मंशा है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन का कहना है कि पहले जो सुझाव दिए गए, आयोग ने उसे नजरअंदाज कर दिया। अब जो हो रहा है, यह आश्चर्य में डालने वाला नहीं है। राजोरी को दक्षिण कश्मीर से जोड़कर कश्मीरियों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया गया है। दोनों संभागों के मसले, आकांक्षाएं और समस्याएं अलग हैं। इन्हें मिलाकर एक संसदीय क्षेत्र बनाने की वजह आयोग ही जानता है। अब पीर पंजाल क्षेत्र को किस संभाग में माना जाए, यह बड़ा सवाल बन गया है। पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने कहा कि अब अनंतनाग लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा सीटों को जम्मू संभाग में दर्शाकर यदि आयोग जम्मू में 51 और कश्मीर में 38 सीटें बताए तो हैरानी नहीं होगी।