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जम्मू कश्मीर: घाटी में मसरत आलम आतंक और अलगाव की पिलाता था घुटी, दहशत के सरगनाओं से रहा है नाता

Thu, 28 Dec 2023 05:06 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार

हुर्रियत में सक्रिय भागीदारी के कारण मसरत आलम कई बार जेल गया, जिससे उसके द्वारा शुरू किए गए गुट मुस्लिम लीग जम्मू-कश्मीर को पहचान मिली।
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masrat alam - फोटो : File Photo
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग का सरबराह मसरत आलम घाटी में युवाओं को आतंक और अलगाव की घुटी पिलाता था। पत्थरबाजी और आतंकवाद से जुड़ने के लिए उकसाता था। उसे पहली बार बीएसएफ ने श्रीनगर में वर्ष 1990 में गिरफ्तार किया और तब उसके आतंकी कमांडर मुश्ताक अहमद के करीबी होने की बात सामने आई। रिहा होने के बाद दादा की दुकान पर काम करने लगा और कश्मीर विश्वविद्यालय से स्नातक की।

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मसरत का जन्म श्रीनगर के हब्बा कदल क्षेत्र के जैनदार मोहल्ला में 1971 को हुआ, यानी जब कश्मीर घाटी में 90 के दशक में हालात खराब हुए तब उसकी उम्र करीब 20 साल थी। वह भी इस विचारधारा से काफी हद तक प्रभावित हुआ और इसमें कूद पड़ा। वर्ष 1999 में मसरत आलम ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस से जुड़ गया और हुर्रियत कार्यकर्ता के तौर पर काम करना शुरू किया। 

हुर्रियत में सक्रिय भागीदारी के कारण वह कई बार जेल गया, जिससे उसके द्वारा शुरू किए गए गुट मुस्लिम लीग जम्मू-कश्मीर को पहचान मिली। आलम 2008 के मुंबई हमलों के मुख्य आरोपी आतंकी हाफिज सईद के समर्थक रहा है और पाकिस्तान व आईएसआई के निर्देश पर 90 के दशक का दौर फिर से दोहराने में काम किया, जिसमें मस्जिदों के स्पीकर से राष्ट्र विरोधी नारेबाजी के साथ हाफिज सैयद जैसे आतंकी की तारीफ होती थी।
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मसरत आलम 2010 में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व में ऐसा अलगाववादी चेहरा बनकर उभरा, जोकि युवाओं में काफी ज्यादा प्रसिद्ध हुआ और उसने तब गिलानी की कश्मीर छोड़ो (गो इंडिया गो बैक) मुहिम में एक अहम भूमिका निभाते हुए अलग से प्रदर्शनों के कैलेंडर जारी कर युवाओं को पत्थरबाजी के लिए उकसाया। 2014 में आम नागरिकों की सेना और सुरक्षाबलों द्वारा सहायता करने पर भी उसने आपत्ति जताई।

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2015 में संयुक्त रैली के बीच लहराया पाकिस्तानी झंडा

2015 में मसरत ने हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दिल्ली से कश्मीर आने पर एक संयुक्त रैली के बीच पाकिस्तानी झंडा लहराया और पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी की, जिसके दूसरे दिन उसे फिर से गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तान द्वारा गिलानी को ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद इस पद पर गिलानी के उत्तराधिकारी मोहम्मद अशरफ सेहराई को नियुक्त किया गया, जिसकी कोरोना से मौत के बाद इस अलगाववादी संगठन की कमान मसरत आलम को सौंपी गई है।

जम्मू की जेल में बंद है मसरत आलम

बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से प्रतिबंधित किए गए जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग से पहले अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (जेकेडीएफपी) को भी देश विरोधी गतिविधियों के लिए गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधित किया है। जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग का मुखिया मसरत आलम इस समय जम्मू की जेल में बंद है।
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