मसरत आलम का जन्म श्रीनगर के हब्बा कदल क्षेत्र के जैनदार मोहल्ला में वर्ष 1971 को हुआ। जब कश्मीर घाटी में 90 की दशक में हालात खराब हुए तब मसरत की उम्र करीब 20 वर्ष के आसपास थी और मसरत भी इस विचारधारा से काफी हद तक प्रभावित था और कश्मीर में बन्दूक की लहर चरम पर थी।
मसरत आलम को पहली बार बीएसएफ द्वारा तब श्रीनगर में वर्ष 1990 में गिरफ्तार किया गया और उसे तब आतंकी कमांडर मुश्ताक अहमद के करीबी सहयोगी होने की बात सामने आई थी। मसरत आलम इसके बाद रिहा हुआ और फिर वह दादा की दुकान पर काम करने लगा। इस बीच कश्मीर विश्वविद्यालय से मसरत ने ग्रेजुएशन की।
वर्ष 1999 में मसरत ने सीधे तौर पर ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस जोकि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गीलानी द्वारा चलाई जा रही थी में शामिल हो गया और हुर्रियत कार्यकर्ता के तौर पर काम करना शुरू किया। इससे मसरत आलम को प्रमुख कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के साथ रह कर एक पहचान मिली।