इससे पहले दिन में छह कांग्रेस विधायकों ने श्रीनगर में बैठक की और पार्टी हाईकमान को नई दिल्ली में विधायक दल के नेता को नामित करने के लिए अधिकृत किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तारिक कर्रा ने कहा कि विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से केंद्रीय नेतृत्व को दल के नेता पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया।मंत्री पद...ऐसी चर्चाएं होती रहती हैं
यह पूछे जाने पर कि क्या इंडिया गठबंधन के किसी नेता को शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया जाएगा, अब्दुल्ला ने कहा कि नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला यह देखेंगे। उन्होंने कहा, फारूक अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन के नेता हैं और अगर कोई निमंत्रण होगा तो उनके नाम पर भेजा जाएगा। उमर ने कहा, जिन लोगों को मुझे आमंत्रित करना है मैं उन्हें कल निमंत्रण भेजूंगा। गठबंधन सहयोगी द्वारा मंत्री पद की मांग के बारे में पूछे जाने पर नेकां नेता ने कहा कि इस तरह की चर्चाएं होती रहती हैं, क्योंकि पार्टियां मिलकर सरकार बना रही हैं। हमें उनका समर्थन पत्र मिला है। हमने आंतरिक चर्चा की है।जम्मू की नहीं होगी अनदेखी
सरकार गठन के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा नेकां को समर्थन देने के बारे में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा कि केवल वे लोग ही उनका समर्थन कर रहे हैं, जो पहले पार्टी का हिस्सा थे। उन्होंने कहा, कुछ को छोड़कर ये वही लोग हैं जिन्हें गठबंधन के कारण टिकट नहीं मिल सका और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। हम उनके समर्थन का स्वागत करते हैं। उन्हें लोगों के वोट मिले हैं, क्योंकि लोग उनसे अपना काम करने की उम्मीद रखते हैं और अब उनका हाथ थामना मेरा कर्तव्य है। जम्मू की अनदेखी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है।
इल्तिजा गुंडागर्दी के सबूत करें पेश
इल्तिजा मुफ्ती की ओर से नेकां कार्यकर्ताओं पर गुंडागर्दी के आरोप लगाने पर उमर ने कहा, इसमें मुझे कुछ नहीं कहना। अगर किसी तरह का सबूत है तो इल्तिजा पेश करें। जिनके खिलाफ आरोप लगे हैं, वे तो उनके खिलाफ अब मानहानि का मामला दर्ज करने जा रहे हैं। अब यह अदालत को फैसला करने दीजिए कौन सही है, कौन गलत।
उमर दूसरी बार संभालेंगे प्रदेश की कमानउमर दूसरी बार प्रदेश की कमान संभालेंगे। उन्हें वीरवार को सर्वसम्मति से नेकां विधायक दल का नेता चुना गया था। मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल 2009 से 2014 तक नेकां-कांग्रेस गठबंधन सरकार के प्रमुख के रूप में भी था। इस बार नेकां ने 90 में से 42 सीटें जीतीं हैं, जबकि गठबंधन सहयोगी कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं। हालांकि दोनों दलों के पास 90 सदस्यीय सदन में बहुमत है, लेकिन चार निर्दलीय और एकमात्र आप विधायक ने भी नेकां को अपना समर्थन दिया है।