श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने वीरवार को सहायक प्रोफेसर कार्डियोलॉजी स्किम्स के रूप में नियुक्ति के लिए तीन डॉक्टरों द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चयन पैनल में किसी भी व्यक्ति को उस पद के खिलाफ नियुक्त नहीं किया जा सकता है जो किसी भी कारण से प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध कराया गया है।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकल पीठ ने वीरवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि किसी संवर्ग में उपलब्ध पद को भरने के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो चयन के बाद पैनल स्वत: समाप्त हो जाता है। इसके बाद किसी भी कारण से उपलब्ध पदों पर नियुक्ति नहीं की जा सकती।
वर्ष 2015 में कार्डियोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक शीर्ष चयन समिति (एएससी) ने तीनों के नामों की सिफारिश की थी। इनमें से एक पद विज्ञापन जारी होने के बाद एक डॉक्टर की सेवानिवृत्ति के कारण खाली हो गया था और उनमें से दो अतिरिक्त आधार पर बनाए गए थे। लेकिन पदों की अनुपलब्धता के कारण उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी। डॉ. आमिर राशिद ने मेरिट सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि तीन अन्य डॉक्टर प्रतीक्षा सूची में पहले दूसरे और तीसरे स्थान पर थे। अदालत ने कहा कि कोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार, सहायक प्रोफेसर कार्डियोलॉजी के रूप में डॉ आमिर राशिद, जो मेरिट में पहले स्थान पर थे उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया था। 12 फरवरी 2019 को कानून सचिव ने सरकार को स्पष्ट किया कि कार्डियोलॉजी में सहायक प्रोफेसर के अकेले पद पर डॉ आमिर राशिद की नियुक्ति के साथ पैनल समाप्त हो गया, यदि प्रतीक्षा सूची तैयार भी की गई तो वह स्वयं समाप्त हो गई। अदालत ने कहा, ऐसा होने पर नियुक्ति नहीं मांग सकते की वे चयनित और नियुक्त उम्मीदवार के लिए प्रतीक्षा सूची में होने के कारण पद के लिए दावेदार हैं। आखिरकार कोर्ट ने डॉक्टर तिकड़ी की याचिका खारिज कर दी।