गुटलीबाग के बाग मालिकों ने कहा कि उन्होंने कीटनाशक का छिड़काव करने के साथ समय पर खाद डाला था। पिछले महीने हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसल को 50 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। ओलावृष्टि से शोपियां, गांदरबल, कुलगाम और तंगमर्ग, रफियाबाद और वागोरा सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। नुकसान की वजह से घाटी के बाजारों में सीमित मात्रा में चेरी पहुंच रही है। भारी पैकेजिंग और शिपिंग लागत के कारण किसान चेरी भेजने का जोखिम नहीं उठाते हैं।
बाग मालिकों ने कहा कि हालांकि गोटली बाग क्षेत्र में उद्यान विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में एक टीम आई है। उन्होंने नुकसान का आकलन किया है। अब देखना यह है कि सरकार से कुछ मदद मिलती है या यह सिर्फ दौरा तक सीमित रहेगा।
कश्मीर में उगाई जाती हैं आठ किस्में
गौरतलब है कि कश्मीर में चेरी की आठ किस्में उगाई जाती हैं। इसमें मखमली, सिया, मिश्री, जदी, इटली, डबल ग्लास, विषकान और स्टेला शामिल हैं। आठ किस्मों में से चार - मिश्री, जड़ी, मखमली और डबल ग्लास की बाजार में अच्छी मांग है। मिश्री को अन्य किस्मों की तुलना में अधिक मीठा माना जाता है। अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाने वाली मिश्री किस्म को पिछले साल दुबई में निर्यात किया गया था।