चुशुल वॉर मेमोरियल पर बलिदानियों को श्रद्धांजलि
सोमवार को दल ने तांगत्से से चुशुल और पैंगोंग त्सो होते हुए हानले की ओर अपनी यात्रा शुरू की। चुशुल पहुंचने पर अभियान में शामिल जवानों ने चुशुल वॉर मेमोरियल पर बलिदान सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
रेजांग ला में 114 वीर सैनिकों को नमन
इसके बाद दल ऐतिहासिक रेजांग ला वॉर मेमोरियल पहुंचा। यहां 1962 के रेजांग ला युद्ध में बलिदान हुए 114 भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान जवानों ने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया।
12 दिन में 2,400 किलोमीटर का सफर
यह अभियान 12 दिनों में करीब 2,400 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इसकी शुरुआत 3 अगस्त को द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल से हुई थी। अभियान के दौरान मोटरसाइकिल दल लद्दाख के ऐतिहासिक युद्धक्षेत्रों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजर रहा है।
कारगिल युद्ध में शामिल जवानों का दल
गनर्स लद्दाख ओडिसी में शामिल जवानों का चयन उन सैन्य इकाइयों से किया गया है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था। अभियान का नेतृत्व मेजर जनरल अरविंद यादव, अतिरिक्त महानिदेशक, आर्टिलरी कर रहे हैं। इसे 8 माउंटेन डिवीजन के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग ब्रिगेडियर सरित प्रकाश ने द्रास से रवाना किया था।
सियाचिन से खारदुंग ला तक पहुंचा अभियान
अभियान के दौरान दल अब तक लेह की शांति स्तूप, तुरतुक, पार्टापुर, खारदुंग ला, सियाचिन बेस कैंप और युद्ध स्मारक समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा कर चुका है। अब दल लद्दाख के अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से होते हुए 14 अगस्त को लेह पहुंचेगा, जहां लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना टीम का स्वागत करेंगे।
युद्धक्षेत्रों की मिट्टी से लगाए जाएंगे पौधे
अभियान के दौरान दल लद्दाख के महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्रों और अग्रिम चौकियों से मिट्टी भी एकत्र कर रहा है। इस मिट्टी से पौधे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें बाद में द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल और दिल्ली के नेशनल वॉर मेमोरियल में लगाया जाएगा। यह पहल कारगिल युद्ध में बलिदान हुए सैनिकों की स्मृति को समर्पित होगी।