राजोेरी। नियंत्रण रेखा पर पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और विशेष रूप से आतंकवादियों की घुसपैठ से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एलओसी में निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। इस सिलसिले में सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर गश्त भी तेज कर दी है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार हाल ही में आतंकवादियों द्वारा बड़े पैमाने पर घुसपैठ के प्रयास और एलओसी के उस पार लॉन्चिंग पैड पर उनकी आवाजाही और उपस्थिति में वृद्धि के बाद अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि इन सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सेना द्वारा प्रतिबंधित एलओसी पर सुरक्षा तंत्र को सर्वोत्तम संभव तरीके से और मजबूत किया है। भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच 26 फरवरी के संघर्ष विराम समझौते के बाद कुछ माह तक शांत रहने के बाद, नियंत्रण रेखा पर राजोेरी और पुंछ जिलों में आतंकवादियों की घुसपैठ देखी गई है। इसके बाद मुठभेड़ें भी हुई। सैन्य और ख़ुफ़िया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार नियंत्रण रेखा से घुसने की कोशिश कर रहे दो आतंकवादी समूहों को रोका गया। जुलाई में जिले में उनके प्रयास को विफल कर दिया गया। जिले के थन्नामंडी के गांवों में दो सप्ताह में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार मारे गए सभी आतंकवादी उस समूह का हिस्सा थे जो हाल के दिनों में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ करने में कामयाब रहा और राजोरी-मुग़ल रोड के रास्ते से घाटी जाना चाहता था।
सूत्रों ने बताया कि इन घटनाक्रमों के मद्देनजर, नियमित सामान्य गश्त के अलावा, जो एलओसी पर सुरक्षा तंत्र का एक हिस्सा है, एलओसी पर और साथ ही एलओसी क्षेत्रों के नजदीकी इलाकों में घुसपैठ के सभी ज्ञात मार्गों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि निगरानी और निगरानी तंत्र जो घुसपैठ रोधी बाधा प्रणाली (एंटी इंफीलस्ट्रेशन ऑब्सतेक्ल सिस्टम ) का एक हिस्सा है, को और मजबूत किया गया है। सूत्रों के अनुसार पूरे एलओसी क्षेत्र में एक कड़ी तकनीकी निगरानी की जा रही है। वहीं आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि नियंत्रण रेखा पर तैनात सभी सैन्य बटालियनों को कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए नवीनतम तकनीकी निगरानी तंत्र से लैस किया गया है, ताकि पाकिस्तान के आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए।