पहाड़ी जनजाति सम्मेलन को संबोधत करते वक्ता।
राजोरी। जिले के ढांगरी क्षेत्र के पास सरड्डनू गांव में पहाड़ी जनजाति का सम्मेलन सोमवार को आयोजित किया गया। लोगों ने एक स्वर में पीएम से अपील कर पहाड़ी जातीयता को एसटी का दर्जा देने की मांग की।
कार्यक्रम के दौरान बातचीत करते हुए सदस्यों ने अपनी स्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की और सरकार से अनुसूचित जनजाति के दर्जे की मांग को पूरा करने की अपील की। प्रतिनिधियों ने दावा किया कि एक मोर्चे पर जब सरकार ने प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम लागू किया, तो पहाड़ी जनजाति के सदस्यों ने विरोध नहीं किया। यहां तक कि उन्हें भी उसी तरह से बाहर कर दिया गया, जिस तरह से हमारे समकालीन को उचित एसटी स्थिति के हमारे कारण का समर्थन करना चाहिए।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि इस बार केंद्र का नेतृत्व पूर्ण बहुमत वाली सरकार कर रही है और दृढ़ विश्वास के साथ एक प्रधान मंत्री जो बहुत वंचित जनजाति की इस वास्तविक मांग को पूरा कर सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में जब भारत सरकार ने डॉ. पीरजादा मोहम्मद की अध्यक्षता में सामाजिक जातीय समिति नियुक्त की तो अपनी रिपोर्ट में कहा कि पहाड़ी जातीयता भारत के संविधान में परिभाषित सभी मापदंडों से एसटी की स्थिति की हकदार हैं।
वर्ष 1989 के बाद से हर सरकार ने पहाड़ी जनजाति को राजनीतिक लाभ के लिए झूठे वादों के साथ आश्वासन दिया, लेकिन अब पूरा विश्वास है कि इस सरकार को इस मुद्दे को हल करना चाहिए। उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और पूर्व प्रधानमंत्री की सिफारिश को याद किया, जब बहुत वंचित जातीयता को एसटी का दर्जा देने का आश्वासन दिया लेकिन दुर्भाग्य से वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ।