नौशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में कालाकोट में चल रही शिव कथा में मंगलवार को श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुमेधा भारती ने माता सती के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता सती प्रभु शिव के मना करने के बावजूद प्रभु श्रीराम की परीक्षा लेने वन में पहुंचती हैं। प्रभु श्रीराम माता सती को पहचान कर ईश्वर रूप को उजागर करते हैं।
रामच रितमानस में कहा गया है कि ईश्वर तर्क वितर्क, मन, बुद्धि और वाणी से परे है। वह ईश्वर अगोचर तत्व है, जिसे इंद्रियों से जाना नहीं जा सकता है। जब-जब मनुष्य इंद्रियों से वशीभूत होकर प्रभु प्राप्ति या महापुरुषों की दिव्य लीलाओं को समझने का प्रयास करता है तो भ्रमित हो जाता है। प्रभु को जानने के लिए जागृत शिव नेत्र की आवश्यकता है। भगवान शिव का तृतीय नेत्र प्रत्येक इंसान के भीतर मौजूद दिव्य नेत्र की ओर इंगित करता है। इंसान का यह दिव्य नेत्र पूर्ण सतगुरु के कृपा हस्त से ब्रह्म ज्ञान दीक्षा के समय तत्क्षण खुल जाता है, और इंसान अपने भीतर प्रभु के दिव्य, अलौकिक, अविनाशी, सनातन रूप का दर्शन अंतर जगत में ही करता है। तत्वज्ञान के द्वारा ही प्रभु की दिव्य लीलाओं की समझ आती है। अत: प्रत्येक इंसान को ब्रह्म ज्ञान दीक्षा के द्वारा तृतीय नेत्र को जागृत करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे। आरती के साथ कार्यक्रम को विराम दिया गया, जिसमें विशेष तौर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी हरिदासा नंद, स्वामी शुक्रमा नंद, विजय सूरी, तिलक राज, दीपक शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा, पूर्व सरपंच, नरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।