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रमजान के महीने को लेकर राजोरी में विद्वानों की बैठक और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।

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रमजान के महीने को लेकर राजोरी में विद्वानों की बैठक और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। - फोटो : RAJOURI
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राजोेरी। जिले के सभी विद्वानों की मुख्य ईदगाह में बुधवार को एक बैठक हुई। इसमें रमजान माह की सहरी और इफ्तार के समय को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
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बैठक में कर्नाटक सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की आलोचना की गई और हिजाब को लेकर हो रहे हंगामे की निंदा की गई। मौलाना फारूक नईमी ने कहा कि रमजान माह में सहरी और इफ्तार के समय पर संयुक्त फैसला लिया गया है, ताकि लोगों को रोजा रखने में दिक्कत न हो और कुछ दिन पहले कर्नाटक में हिजाब (घूंघट) को लेकर हुए हंगामे की भी निंदा की गई। मौलाना फारूक ने कहा कि जिले के विद्वानों और मुसलमानों की ओर से हम कर्नाटक सरकार और उस विश्वविद्यालय के प्रशासन की कड़ी निंदा करते हैं। केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि विश्वविद्यालय प्रबंधन और अन्य के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मौके पर खतीब गुलाम रसूल ने भी कर्नाटक सरकार की निंदा की और कहा कि हिजाब विरोधी अभियान से मुसलमान नहीं डरेंगे और एक महिला के साथ हिजाब को लेकर विवाद असहनीय है। भाईचारा बना रहे, विद्वानों ने सर्वसम्मति से दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
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बैठक में खतीब सेंट्रल जामिया मस्जिद सिटी गुलाम रसूल, अध्यक्ष अंजुमन उलेमा अहल-ए-सुन्नत मौलाना फारूक नईमी, अध्यक्ष तहरीक-ए-उलेमा अहल-ए-सुन्नत मौलाना मुहम्मद हनीफ रजा, खतीब जामिया मस्जिद दरहाल हफीज सैयद, खतीब जामिया मस्जिद कोटरांका हाफिज इलियास, मौलाना मोहम्मद यूनुस कादरी, मुफ्ती मारोव, मौलाना यासीन और अन्य विद्वान भी उपस्थित थे।
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