जिले में पुलिस, यातायात पुलिस, एआरटीओ आदि की तरफ से वाहन चालकों के खिलाफ सख्ती बरतने के बाद भी ओवरलोडिंग जारी है।
हर दिन लोगों को जानहथेली पर रख कर वाहानों की छतों पर अथवा उनके साथ लटक कर सफर करना पड़ता है।
जिले में यात्री वाहनों में होने वाली ओवरलोडिंग का यह आलम ह ैकि 7 की क्षमता वाली टाटा सूमो में खास कर पुंछ मेंढर मार्ग पर 10-12 सवारियां ठूंस कर भरी जाती हैं।
इतनी ही सवारियां छतों पर बैठाई जाती हैं। 22 की क्षमता वाली मेटाडोरों में 50 से 60 तक यात्री ढूंसे जाते हैं। 8 की क्षमता वाले आटो में 22 सवारियां लादी जाती हैं।
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण हर समय हादसों की आशंका बनी रहती है, लेकिन वाहन चालक चंद रुपयों के लालच में अपनी और यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ करते हैं।