पुंछ। जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों के बीच की दूरियां कम करने और भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार के लिए चक्कां दा बाग और उड़ी कमान पोस्ट से वर्ष 2008 में क्रॉस एलओसी ट्रेड शुरू किया गया। दो वर्ष बाद से ही यह विवादों में घिरने लगा। गड़बड़ियां सामने आने पर इस ट्रेड को कई बार रोक दिया गया, लेकिन व्यापारियों के दबाव में इसे फिर बहाल कर दिया जाता।
क्रॉस एलओसी ट्रेड में दूसरे राज्यों के व्यापारियों द्वारा स्थानीय एजेंटों की ट्रेड फर्मों के नाम पर एलओसी पार सामान भेजने से लेकर विदेशी वस्तुओं के लेनदेन तक की गड़बड़ियां होती रहीं।
ट्रेड में जड़ी बूटियों के नाम पर आने वाली वस्तुओं की ठीक से जांच नहीं होती थी। उस पार से आने वाले सामान में बंदूक की गोलियां मिलने की घटनाएं भी सामने आईं। व्यापारियों और सरकारी विभागों के जांच अमले में गठजोड़ भी बातें भी उजागर हुईं। ऐसे में कई बार कई दिन तक व्यापार भी बंद करना पड़ा। लेकिन क्रॉस एलओसी ट्रेड में सबसे बड़ा विवाद ट्रेड में शामिल वस्तुओं को लेकर रहा है। क्योंकि जब ट्रेड शुरू हुआ तो उसमें यह शर्तें रखी गईं कि जम्मू-कश्मीर में होने वाली वस्तुओं अथवा उत्पादों को उस पार भेजा जाएगा। पीओके में होने वाली वस्तुओं को इस पार भेजा जाएगा, लेकिन उस पार से पाकिस्तान समेत अफगानिस्तान, चीन और कैलिफोर्निया तक की वस्तुएं भेजी जाती रहीं। इसमें सूखे मेवों के नाम पर अफगानिस्तान का अंजीर, काठा बादाम, अनारदाना, अरब देशों की खजूर और छुहारे, चीन की दालें, लहसुन प्याज और कैलिफोर्निया की बादाम गिरी इस पार भेजी जाती रही है।
इस पार से सूखे मेवों में गरी, हरा नारियल, मोटी ईलायची, जीरा आदि वस्तुएं उस पार भेजी जाती रही हैं। चूंकि इन वस्तुओं का जम्मू-कश्मीर में उत्पादन नहीं होता, इसके चलते अधिकारी इन पर रोक लगा देते। हालांकि व्यापारियों के दबाव बनाए जाने पर इन वस्तुओं का व्यापार फिर बहाल भी होता रहा। एनआईए के रडार पर सबसे पहले कैलिफोर्निया से आने वाले बादाम व कुछ अन्य वस्तुओं का लेनदेन आया। इस महंगे सामान के उस पार भेजे जाने पर पैसा ज्यादा मिलता, जिसे टेरर फंडिंग से जोड़कर देखा गया।