उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा हैं कि जम्मू कश्मीर में समतावादी समाज के निर्माण के लिए प्रयास जारी हैं। तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं ताकि योजनाओं व फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया में देरी को कम किया जा सकें। सिन्हा ने श्रीनगर में दो दिवसीस सुशासन सम्मेलन में अपने संबोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा जवाबदेही, नैतिक रूप से सत्य और कार्य उन्मुख नीतियों से मतभेद पैदा होते हैं।
हमे यह याद रखसने की जरूरत हं कि प्रत्येक फाइल और प्रत्येक सिंगल नोट के पीछे लोग हैं। ऐसे में अधिकारियों को मानवीय संवेदना के साथ काम करना चाहिए। उपराज्यपाल ने कहा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठनों और विशेषज्ञों के संयुक्त मंच को सृजित करने की प्रांसगिकता नागरिक केंद्रित शासन की बेहतर अभ्यासों को लागू करने की हैं। प्रशासनिक अन्वेंशन, कल्याणकारी कार्यक्रम, डिजिटल कार्य, कार्मिक प्रशासन और प्रभावी प्रशासन का क्षमता निर्माण करने की हैं।
उन्होंने इस अवसर पर जम्मू कश्मीर प्रशासन के 2000 अधिकारियों के क्षमता निर्माण के लिए जेके इंपार्ड और नेशनल सेंटर फार गुड गर्वनेंस में एमओयू साइन होने पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा आईएएस की तर्ज पर प्रदेश के अधिकारियों को मिड कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ मिलेगा। सरकारी संस्थान, योजनाओं, विभिनन कार्यकमों, समाज कल्याण गतिविधियों को लाभ आखिरी पंकित में खड़े आखिरी व्यकित तक पहुंचे तभी असल में विकास संभव होगा। उन्होंने लोगों को जवाबदेह सुशासन पर बल दिया।
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उन्होंने कहा जेके बीम्स, इंपावरमेंट कवायद से जम्मू कश्मीर शासन प्रक्रिया में पारदिशता के मामले में देश की प्रमुख राज्यों व प्रदेशों में शामिल हैं। उन्होंने कहा ई आरपिस के सुधारात्मक कदम से दरबार मूव की चली आ रही परंपरा को खतम किया जा सका हैं और इससे करोड़ों रुपये की बचत हुई हैं।
उन्होंने मुख्य सचिव और उनकी टीम की तरफ से पारदर्शित जवाबदेह जम्मू कश्मीर बनाने की तरफ उठाए कदमों की सराहना भी की। उन्होनें कहा सभी 54 समाज कल्याण योजनाएं लोगों की बेहतरी के लिए लागू की गई हैं। उन्होंने कहा थ्री टियर पंचायती राज व्यवसथा की स्थापना की गई हैं।12600 करोड़ का जिला पूंतिगत बजट घोषित हुआ हैं।