कश्मीर सेंटर फॉर सोशल एंड डेवलपमेंट स्टडीज (केसीएसडीएस) और जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन द्वारा शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। संगठनों ने कहा है कि सरकार कुछ प्रस्तावों से राज्य की जनसांख्यिकी को खराब कर सांप्रदायिक भेदभाव पैदा करना चाहती है।
केसीएसडीस की अध्यक्ष प्रोफेसर हमीदा नईम ने कहा कि सरकार ने रिटायर्ड सैनिकों के लिए सैनिक कॉलोनियां बनाने का प्रस्ताव दिया है। जम्मू और कुपवाड़ा में नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन (एनयूएलएम) 2015-2016 के अंतर्गत बेघर गैर राज्य विषयों के लिए स्थायी घरों के निर्माण, कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष कॉलोनियां और राज्य में एनईईटी लागू करना।
उन्होंने कहा कि यह सब सरकार के विश्वासघाती प्रस्ताव हैं जिनके पीछे उद्देश्य स्टेट सब्जेक्ट लॉ को कमजोर करना है। इसे हम कभी नहीं होने देंगे। सैनिक कॉलोनियों और बेघर गैर राज्य विषयों के लिए स्थायी घरों के निर्माण को लेकर हमीदा का कहना था कि इससे यहां के हालात बिगाड़ेंगे। ऐसी कोशिश 2008 में भी हुई थी और फिर अमरनाथ जमीन विवाद वाला बवाल हुआ था।
यदि आज भी साकार नहीं सुधरेगी, तो फिर से वैसा ही दौर आ सकता है। वहीं, कश्मीरी पंडितों के लिए कॉलोनी को लेकर उनका कहना था कि हमने हमेशा उनका स्वागत किया है। वे आएं और अपने घरों में बसें। बस हम उनकी अलग कॉलोनी बनाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि एनईईटी मामले में जो कुछ सरकार कर रही है उससे स्थानीय छात्रों की अहमियत बाहरी छात्रों की तुलना में कम हो जाएगी।