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पेड़ों से लिपट कर उनकी रक्षा करेंगे, कटने नहीं देंगे

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कठुआ। कंडी क्षेत्र के घनी आबादी वाले इलाके में औद्योगिक इकाइयों को स्थापित किए जाने का बरवाल के लोगों ने कड़ा विरोध किया है। सोमवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने इसके खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार से इलाके के पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बंद किए जाने की मांग की है। वहीं, इस दौरान ग्रामीणों ने चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से लिपट कर उनकी रक्षा करने का प्रण लिया।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अमरीश जसरोटिया ने कहां की घनी आबादी वाले इस इलाके में विकास के नाम पर लगाई जाने वाली औद्योगिक इकाइयां क्षेत्र के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि बरवाल और बुद्धि गांव के बीच के इलाके में विकसित किए जा रहे इस औद्योगिक क्षेत्र के लिए वहां लगे हजारों पेड़ों को काटा जाएगा, जो कि उन्हें कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण से होने वाले खिलवाड़ को स्थानीय लोग कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके लिए जिस भी हद तक जाना पड़े उसके लिए वह तैयार है। क्योंकि उनके बुजुर्गो द्वारा लगाए गए पेड़ और जंगल उन्हें प्रदूषण के कारण होने वाले नुकसान से लंबे समय से बचाते आ रहे हैं। वहीं, प्रदर्शन में शामिल गांव के पूर्व सरपंच पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि कोरोना की महामारी के दौरान महानगरों में शुद्ध ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए लोगों ने हजारों रुपये खर्च किए लेकिन उनके इलाके में इन्हीं हरे भरे पेड़ों के कारण ही लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन मिलती रही है। इसके अलावा इन्हीं पेड़ों के कारण यहां के स्वच्छ वातावरण ने इलाके के लोगों को रोगमुक्त रखा है। शुद्ध वातावरण के कारण यहां के हजारों युवा देश की रक्षा का दायित्व संभाल रहे हैं। अगर इस इलाके में औद्योगिक इकाइयां लगाई जाती हैं तो इससे न केवल उनका गांव बल्कि आसपास के करीब 10 गांव को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि जिला के जिन स्थानों पर औद्योगिक इकाइयां पहले से लगी हुई है वहां सरकार अब तक प्रदूषण कंट्रोल डिवाइस तक नहीं लगवा सकी है, लिहाजा अपने इलाके की हवा, पानी और वातावरण के साथ होने वाले खिलवाड़ को वह लोग कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके लिए सरकार का हर मंच पर विरोध करेंगे।
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