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अरुण को तिरंगे में लिपटे देख बेसुध हो गई पत्नी, मां व भाई

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शहीद पति के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करती शहीद की नवविवाहिता। फोटो अनिल कुमार - फोटो : KATHUA
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कठुआ/लखनपुर। अब मैं यहां रहकर क्या करूंगी, मुझे भी जाने दो। शहीद पति अरुण काटल को तिरंगे में लिपटे देख सुनीता यह कहते ही बेहोश हो गई। शहीद की माता शीला देवी भी पिछले 6 दिनों से बेटे के कुशल होने की कामना कर रही थीं। शनिवार दोपहर जब शहीद का शव उनके घर पहुंचा तो कलेजे के टुकड़े को तिरंगे में लिपटा देख वह अपने आप को नहीं रोक सकी।
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देश की रक्षा का दायित्व निभाने के बाद अरुण काटल के छुट्टी पर घर आने की राह देख रहे परिवार के सदस्य उसके इस तरह से आने पर अपना आपा खो बैठे थे। भाई का अंतिम संस्कार करने के लिए बैठे छोटे भाई अमन ने जैसे ही अंतिम दर्शन के लिए शहीद का चेहरा देखा तो वह भी बेसुध होकर नीचे गिर पड़ा। पूरे गांव को द्रवित कर देने वाला यह मंजर देखने वाली हर आंख नम हो गई। वहां मौजूद अधिकारियों और वरिष्ठ नागरिकों ने अंतिम दर्शन के बाद अंत्येष्टि के लिए प्रक्रिया शुरू की तो शहीद के परिवार को संभालना और मुश्किल हो गया। शहीद की पत्नी सुनीता ने अरुण के साथ कई सपने बुने थे, लेकिन शादी के महज 4 महीने बाद ही पति का साथ छूटने वह बेसुध हो गई थी। सात अक्तूबर को अरुण काटल के सिर शादी का सेहरा बंधा था। पत्नी और मां को अरुण मार्च या अप्रैल महीने में लौटने का वादा कर गया था। इसी आस में शाम तक अरुण के परिजन उसके सकुशल लौटने की दुआएं करते रहे।
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गांव में शहीद पर की पुष्पवर्षा
कठुआ। अरुणाचल प्रदेश में हिमस्खलन के दौरान शहीद हुए अरुण काटल का पार्थिव शरीर जैसे ही लखनपुर पहुंचा तो चारों ओर भारत माता के जय घोष होने लगे। हजारों की संख्या में तिरंगों के साथ शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल युवाओं ने उनकी शहादत को अपना सलाम पेश किया। शहीद के पार्थिव शरीर के जंडोर गांव पहुंचते ही जगह-जगह पुष्पवर्षा होने लगी। सुबह से ही शहीद अरुण के पार्थिव शरीर के आने की सूचना मिलने के बाद उनके गांव तक जाने वाले रास्ते में हजारों लोग गांव के वीर बेटे के आखिरी दर्शन पाने के लिए बैठे रहे। वहीं कस्बे में दिन भर देशभक्ति तराने गूंजते रहे। लखनपुर से जैसे ही शहीद अरुण काटल के पार्थिव शरीर को ले जा रहा काफिला पैतृक गांव जंडोर की ओर बढ़ा जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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