हीरानगर। पहली से आठवीं कक्षा तक के स्कूल खुलने के दूसरे दिन स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अभी भी 100 प्रतिशत हाजिरी नहीं हुई है। दो वर्षों बाद स्कूल खुलने पर यातायात की उचित सुविधा न मिलने से अभिभावक परेशान हैं।
जिन स्कूलों की ओर से बस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, वहां हाजिरी पूरी हो रही है। जबकि जो बच्चे लोकल सर्विस लेकर स्कूल जाते हैं, उनको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वार्षिक परीक्षाओं तक बच्चे कुछ दिन ही स्कूल जाएंगे। जिसे देखते हुए कोई ऑटो या बस चालक सर्विस देने को तैयार नहीं हो रहे हैं। जो जाने को तैयार हैं वे पूरे महीने का किराया मांग रहे हैं, जो अभिभावकों को मंजूर नहीं है।
रविंद्र कुमार ने बताया उनके दोनों बच्चे हीरानगर के एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं। कोरोना से पहले वह एक लोकल ऑटो में स्कूल जाते थे। अब स्कूल फिर से खुले हैं तो ऑटो चालक ने किराया डबल करने की शर्त पर जाने की बात की और यह भी कहा कि बच्चे वार्षिक परीक्षाओं तक 10 दिन जाएं या 15, पूरे महीने का किराया लेगा। उन्होंने कहा अभिभावकों पर खर्चे का बोझ बढ़ता जा रहा है जिससे घरों का बजट भी खराब हो रहा है।
वहीं, दूसरी तरफ जम्मू-कठुआ रूट पर चलने वाली बसों में भी छोटे-बड़े बच्चों से पूरा किराया वसूला जा रहा है। लोगों ने इस पर कार्रवाई करने की मांग भी की है।