प्राइमरी हेल्थ सेंटर रामकोट की जर्जर इमारत। संवाद
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रामकोट। पीएससी रामकोट की खस्ताहाल पड़ी इमारत की मरम्मत करने की मांग स्थानीय लोगों की ओर से की गई। नायब सरपंच रामकोट अश्वनी कुमार का कहना है कि 1960 में रामकोट में स्वास्थ्य विभाग की इमारत बनकर तैयार हुई थी और इसका उद्घाटन किया गया था। तब पीएचसी रामकोट सब सेंटर के रूप में शुरू हुआ था। लंबा समय बीतने और मरम्मत ना होने से अब स्वास्थ्य केंद्र की इमारत जर्जर हो गई है। स्थानीय लोगों ने जर्जर इमारत की मरम्मत किए जाने की मांग उठाई है।
पंच रामपाल शर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से कई वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विभाग की इमारत बनाई गई थी। इसके बाद कई वर्ष बीत गए इमारत की मरम्मत नहीं की गई। पीएचसी रामकोट में दो कमरे एक प्रयोगशाला और एक स्टाफ नर्स के लिए कमरा और एक हॉल है। हॉल में ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों के लिए कुछ बेड लगाए गए हैं। पीएचसी रामकोट में मरीजों के लिए शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। सरपंच प्रदीप सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में तो पानी हर समय छत से टपकता रहता है। हर कमरे में बरसात के मौसम में पानी भर जाता है। इससे लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता। स्थानीय शंकर सिंह ने बताया कि पीएचसी रामकोट के पीछे घना जंगल है, जहां हर दिन तेंदुए के आने की आशंका भी बनी रहती है। पीएचसी के पीछे की चारदीवारी ना होने के कारण तेंदुए के अंदर आने की आशंका बनी रहती है। इससे तेंदुए का डर हर समय सताता रहता है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से चारदीवारी की मरम्मत करने की मांग की। रामकोट के पवन खजूरिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की इमारत जर्जर है। इमारत के गिरने का डर हमेशा बना रहता है। क्षेत्रीय जनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पीएससी की इमारत की जल्द से जल्द निर्माण किया जाए।