बसोहली। ट्रैक्टर यूनियन द्वारा माइनिंग का मुद्दा डीसी के संज्ञान में लाने के बाद मंगलवार को डाली खड्ड में टीमों को भेजा गया। इसमें माइनिंग विभाग के साथ रेवेन्यू, वन विभाग के अधिकारी शामिल रहे।
उन्होंने माइनिंग ब्लॉक बनाने के लिए जरूरी प्वाइंट का निरीक्षण किया। इस मौके पर नायब तहसीलदार अल्ताफ हुसैन मौजूद रहे। इनकी देखरेख में सारा काम किया गया। उधर, ट्रैक्टर यूनियन ने कहा कि एक माह में माइनिंग की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह सड़क पर उतरेगी।
डीएमओ बोधराज ने बताया कि डाली खड्ड में पंचायती राज इंस्टीट्यूशन के लिए एक हेक्टेयर से कम भूमि पर तीन माइनिंग ब्लॉक को चिह्नित किया जा रहा है। एडीसी को टाइटल वेरिफिकेशन के लिए लिखा गया है।
विभिन्न विभागों को एनओसी के लिए भी लिखा गया है। उसी के तहत माइनिंग विभाग के टेक्निकल विंग ने दौरा किया है। 2 मिनरल गार्ड जिनमें नरेंद्र सिंह और कोमल शामिल हैं, इनमें से कोमल एक्सपोर्ट हैं।
मंगलवार को डाली खड्ड पहुंचे ट्रैक्टर यूनियन के प्रधान संजय राजदान, उपप्रधान नरेश सिंह, मारता नगरोटा के नायब संरपंच अजीत सिंह, लक्की ने प्रशासन और माइनिंग विभाग से दो टूक कहा कि अगर एक माह के भीतर समाधान नहीं किया गया, तो ट्रैक्टर यूनियन से जुड़े करीब पांच हजार परिवार सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में करीब पांच हजार परिवार ऐसे हैं, जो पूर्णता माइनिंग पर रोजी-रोटी के लिए निर्भर करते हैं। माइनिंग बंद होने के बाद कई ट्रैक्टर चालकों को अपनी ट्रैक्टरों की किस्तें देने के लिए भी पैसे नहीं बचे है। कई ट्रैक्टरों को बैंक किस्त अदा न करने के चलते जब्त भी कर चुका है।
श्मशान घाट जाने के लिए भी नहीं बचा रास्ता
माइनिंग बंद होने के बाद डाली खड्ड स्थित श्मशान घाट की ओर जाने वाले रास्ते को भी प्रशासन द्वारा बंद करवा दिया गया था, जिसके बाद श्मशान घाट की ओर जाने वाला मार्ग भी बंद हो चुका है। स्थानीय लकी सिंह ने बताया कि श्मशान घाट का रास्ता खुलवाने के लिए कभी वन विभाग को तो कभी प्रशासनिक अधिकारियों को फोन करने पड़ते हैं। अब तो रास्ता बिल्कुल बंद हो चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई है कि शमशान घाट की ओर जाने वाले रास्ते को खोला जाए, ताकि मृतकों के अंतिम संस्कार आसानी से किया जा सके।