कठुआ। प्रदेश में अगले सीजन तक दूध का उत्पादन दोगुना होने की संभावना है। इसमें प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालन विभाग के सहयोग से लखनपुर में आयोजित किए जा रहे पशुधन मेले मील का पत्थर साबित होने जा रहे हैं।
अबतक पिछले छह पशुधन मेलों में उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से आए व्यापारियों से प्रदेश और आसपास के किसानों ने लगभग 25 सौ दुधारू पशुओं की खरीद की है। क्रॉस ब्रीड में बीते रविवार एक लाख 40 हजार लागत की एक गाय अबतक सबसे अधिक दाम में बिकी है।
कठुआ जिले की बात करें, तो यहां प्रतिदिन तीन लाख तीस हजार लीटर दूध का उत्पादन किया जाता है। एकीकृत डेयरी विकास योजना के तहत नगरी और आसपास के क्षेत्रों में किसानों का रूझान बढ़ा है।
हीरानगर और कंडी इलाकों से भी बड़ी संख्या में किसान दुधारू पशुओं की खरीद के लिए हर रविवार लखनपुर में आयोजित होने वाले पशुधन मेले में पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि पशुपालन विभाग इस बात को तय मानकर चल रहा है कि आने वाले सीजन में जिले में ही कई गुना तक दूध उत्पादन बढ़ जाएगा।
ऐसे में लागत को पूरा करने के बाद सरप्लस दूध आसानी से किसान पड़ोसी राज्य और पड़ोसी जिलों को भी बेच पाएंगे। संभाग में चल रहे कई घी उत्पादन की इकाइयां भी हाथों हाथ किसानों से दूध लेने के लिए इन दिनों आगे आ रही हैं।
50 फीसदी सब्सिडी का भरपूर फायदा उठा रहे किसान
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर प्रतिदिन 70 लाख लीटर दूध का उत्पादन करता है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में देश के अन्य हिस्सों से दूध की सप्लाई जम्मू-कश्मीर में पहुंचती है। ऐसे में एकीकृत डेयरी विकास योजना प्रदेश के किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। इसमें किसानों को विभाग की ओर से पचास फीसदी तक सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाती है।
पहले जहां सूचीबद्ध होने के बाद आवेदक किसानों को पंजाब से जाकर पशु लाने पड़ते थे। वहीं लखनपुर में मंडी सहित कई विकल्प उपलब्ध होने पर किसानों के लिए राह और भी आसान हो गई है। रिंडरपेस्ट चेकपोस्ट लखनपुर में तैनात डॉ. रामपाल ने बताया कि कोई भी किसान या युवा डेयरी उद्योग से अपना कारोबार शुरू कर सकता है और अच्छी आमदनी बना सकता है। डेयरी फार्म खोलने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हुई हैं।
इंटीग्रेटिड डेयरी डेवलपमेंट योजना के अंतर्गत 5 से 50 मवेशी की डेयरी स्थापित की जा सकती हैं। इसमें न्यूनतम पांच गाय से डेयरी यूनिट की शुरूआत की जा सकती है। लखनपुर में लगाए जा रहे पशुधन मेले में विभाग किसानों को दुधारू पशुओं की खरीद के लिए प्लेटफार्म मुहैया करवा रहा है जिसका बड़ी संख्या में किसान लाभ ले रहे हैं।
पशुधन मेला दुधारू पशुओं की बिक्री
28 नवंबर 549
5 और छह दिसंबर 399
12 दिसंबर 384
19 दिसंबर 528
26 दिसंबर 193
2 जनवरी 322
जर्सी, फ्रिजीयन गाय और मुर्रा नस्ल की भैंसें बनीं पहली पसंद
लखनपुर के पशुधन मेलों में प्रदेश और आसपास के इलाकों से आने वाले किसानों के लिए जर्सी और फ्रिजीयन किस्म की गाय और मुर्रा नस्ल की भैंसें पहली पसंद बन रही हैं। मेले में दो लाख रुपये कीमत की भैंस को भी खरीदारी के लिए रखा जा चुका है।
50 वर्षों में प्रदेश में 10 हजार डेयरियां ही खुल पाई हैं। लेकिन अब रोजाना एक दर्जन से ज्यादा डेयरी उद्योग लगाने के लिए पशुपालक आवेदन कर रहे हैं। पशुपालकों की सुविधा को देखते हुए यह मेले आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश के पशु पालकों को पंजाब, हरियाणा या राजस्थान आदि राज्य में जाकर पशु खरीदने के लिए परेशान न होना पड़े। प्रदेश में दुधारू पशुओं की किस्म को बेहतर करना भी इन मेलों का मकसद है, ताकि प्रदेश दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके।
- नवीन चौधरी, प्रधान सचिव, पशु एवं भेड़पालन विभाग